मार्च अंत और अप्रैल के शुरू में ही ये विकराल स्थिति खड़ी हो गई। बरसात से पहले आने वाले मई और जून महीनों में पेयजल व्यवस्था कैसे होगी? यह बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
आईपीएच महकमे के प्रमुख अभियंता अनिल बाहरी का कहना है कि कई जिलों में पेयजल संकट खड़ा हो गया है। इनमें गांवों में खड्डों, नालों, चश्मों, झरनों आदि तमाम स्रोतों में पानी की मात्रा 25 से 30 फीसदी तक घट गई है। आने वाले दिनों में यह मात्रा और भी घट सकती है।
इससे स्थिति और खराब होगी। कई जगहों पर रोजाना पीने के पानी की आपूर्ति नहीं की जा पा रही है। ऐसे क्षेत्रों में कह दिया गया है कि पेयजल की ये सप्लाई तीसरे दिन या वैकल्पिक दिवस पर की जाए, मगर ये नियमित रूप से रहे। इसके लिए जलस्रोतों में पानी के भंडारण पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज्य में पेयजल दरें एक अप्रैल से दस फीसदी बढ़ जाएंगी। पेयजल और वाणिज्यिक कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी की दरें दस-दस फीसदी के हिसाब से ही बढ़ाई जाएंगी। यानी, 30 अप्रैल के बाद पानी के जो बिल आएंगे, वे बढ़ी दरों के अनुसार आएंगे।
हिमाचल में घरेलू इस्तेमाल को पेयजल की दरें एक हजार लीटर पर 34.54 रुपये होंगी। व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए ये 27.70 रुपये होंगी। प्रति एकड़ सिंचाई के लिए ये उठाऊ सिंचाई जल योजना मेें 53.79 रुपये होंगी। इसकी अधिसूचना आगामी दिनों में जारी होगी। शहरी क्षेत्रों में इनकी अलग दरें हैं।
फील्ड स्टाफ को केवल आपात स्थिति में ही मिलेगी छुट्टियां
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य महकमे ने निर्देश जारी किए हैं कि फील्ड स्टाफ को केवल आपात स्थिति में ही छुट्टी मिलेगी। ऐसा स्टाफ की कमी के कारण किया गया है, जिससे कि ये पेयजल आपूर्ति में मुस्तैद रह सके। ये निर्देश मई या जून महीने तक जारी रहेंगे।