बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा(फाइल फोटो)
उनके उत्तराधिकारी का फैसला सिर्फ तिब्बत की जनता करेगी। धर्मगुरु ने कहा ‘जब मैं 69 साल का था तो मैंने एक आधिकारिक बयान दिया था कि यह संस्थान आगे चलना चाहिए या नहीं, यह मैं तिब्बत की जनता पर छोड़ता हूं।
दलाईलामा पदवी के भविष्य पर इसी वर्ष विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके लिए इस वर्ष हमारे उच्च लामा और निर्वासित तिब्बत सरकार के पदाधिकारी बैठकों में चर्चा करेंगे।
मुझे लगता है कि वे इस संस्थान को आगे बढ़ाने का निर्णय लेंगे। दलाईलामा ने कहा कि यह मेरा विषय नहीं है। बौद्ध भिक्षु होने के नाते मेरी रोजमर्रा की जिंदगी लोगों के लिए समर्पित है।’
उधर निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. लोबसंग सांग्ये ने चीन की प्रतिक्रिया पर कोई कमेंट नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराधिकारी को लेकर चीन की इस प्रतिक्रिया पर धर्मगुरु दलाईलामा ही प्रतिक्रिया दे सकते हैं।