भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान ने भोटी भाषा एवं बौद्ध दर्शन को अपने शिक्षा बोर्ड में मान्यता दे दी है। प्रमाण पत्र लेने के लिए भिक्षुओं को बौद्ध दर्शन के साथ गणित, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और सोशल साइंस भी पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न बौद्ध मठों में शिक्षा ग्रहण कर रहे बौद्ध भिक्षुओं को भी सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र मिलेंगे। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान ने भोटी भाषा एवं बौद्ध दर्शन को अपने शिक्षा बोर्ड में मान्यता दे दी है। प्रमाण पत्र लेने के लिए भिक्षुओं को बौद्ध दर्शन के साथ गणित, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और सोशल साइंस भी पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाएंगे। पहले बौद्ध मठों में सिर्फ बौद्ध दर्शन ही पढ़ाया जाता था। भारतीय हिमालय नालंदा बौद्ध परंपरा परिषद के प्रयासों से यह संभव हुआ है।
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परिषद के अध्यक्ष टीके लोचेन टुल्कू, महासचिव मालिंग गोम्पा, उपाध्यक्ष एचसी नेगी ने कीह बौद्ध मठ में भिक्षुओं के साथ बैठक में यह बात कही। उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्रों में चल रहे बौद्ध मठों में अध्ययन कर रहे भिक्षुओं को सरकारी मान्यता प्राप्त शिक्षण प्रमाण पत्र प्राप्त होंगे। पहले बौद्ध मठों में बौद्ध दर्शन का अध्ययन कर रहे भिक्षुओं को दशकों तक शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाद भी सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र नहीं मिलता था। अब सरकारी स्कूलों की तरह प्रमाण पत्र मिलेगा। भिक्षुओं को बौद्ध दर्शन के साथ गणित, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और सोशल साइंस भी पढ़ाए जाएंगे।
टीके लोचेन टुल्कू ने कहा कि यह हर्ष का विषय है। इसी सिलसिले में परिषद के महासचिव मालिंग गोम्पा, उपाध्यक्ष एचसी नेगी और इंटरनेशनल बुद्धिष्ट कन फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. धम्या प्रिया हिमालय क्षेत्र के विभिन्न बौद्ध मठों में जाकर अध्ययनरत भिक्षुओं एवं भिक्षुणियों से चर्चा कर उनसे राय ले रहे हैं। कमेटी के सदस्यों ने स्पीति क्षेत्र के ताबो, डंखर, कुंगरी, तंज्ञुत और कीह बौद्ध विहारों के साथ कवांग, मोरंग और पंगमोर गोम्पाओं, का भी दौरा किया। इसके बाद कमेटी के सदस्य लाहौल का दौरा करेंगे।