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सैकड़ों बीएससी नर्सिंग प्रशिक्षुओं की डिग्री लटकी

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कोरोनाकाल में कक्षाएं न लगने पर प्रशिक्षुओं को आई है री-अपीयर, ग्रेस मार्क्स देने की उठाई मांग
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एसएफआई का तर्क, अन्य छात्रों की तरह दें राहत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेेश के विभिन्न नर्सिंग संस्थानों से नर्सिंग कर रही हजारों प्रशिक्षुओं का भविष्य दांव पर लग गया है। बीएससी नर्सिंग के अंतिम वर्ष के घोषित परीक्षा परिणाम में फेल या री-अपीयर आई सैकड़ों प्रशिक्षुओं की जहां डिग्री लटक गई है वहीं अब इनकी नौकरी जाने का भी खतरा मंडराने लगा है। दरअसल अंतिम वर्र्ष की यह अधिकतर प्रशिक्षु नर्सें निजी अस्पतालों में स्टाइपेंड पर नौकरी कर रही हैं, डिग्री हाथ में आते ही यह यहां नियमित नौकरी कर सकती हैं। लेकिन फेल या री अपीयर आने से अब इन्हें यह नौकरी छोड़नी होगी। प्रशिक्षुओं का कहना कि कोरोनाकाल में प्रदेश सरकार ने जिस तरह दसवीं और बाहरवीं कक्षा के विद्यार्थियों को प्रमोट करने का फैसला लिया है उसी आधार पर इन्हें भी ग्रेस मार्क्स देकर पास किया जाए।
दूसरी एसएफआई की राज्य कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को उच्च शिक्षा निदेशक से मुलाकात कर प्रशिक्षुओं को ग्रेस मार्क्स देने की मांग उठाई है। कहा कि कोरोना संक्रमण के बीच जहां हजारों छात्रों को प्रमोट किया जा रहा है वहीं प्रशिक्षु नर्सों को भी ग्रेस मार्क्स देकर उनकेे भविष्य को सुरक्षित करें। एसएफआई के राज्य सचिव अमित ठाकुर और उपाध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि कोरोना के कारण बीते और इस सत्र में नर्सिंग संस्थान महीनों बंद रहे हैं। इस कारण इन प्रशिक्षुओं की अस्पतालों में होने वाली ट्रेनिंग भी पूरी नहीं हो पाई। इससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है। चार मई को विवि द्वारा घोषित किए अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणाम में ऐसी प्रशिक्षु भी फेल हुई हैं जो अब तक टॉपर आती रही हैं। ऐसी करीब एक हजार प्रशिक्षु हैं जो फेल हुई हैं या फिर उनकी किसी न किसी विषय में री-अपीयर आई है।
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यूजी कक्षाओं का परीक्षा परिणाम घोषित करें
शिमला। एसएफआई ने उच्च शिक्षा निदेशक से यूजी कक्षाओं के सभी लंबित परिणाम तुरंत घोषित करने की मांग की है। इसके साथ एचपीयू के यूआईटी संस्थान द्वारा एकमुश्त हजारों रुपये फीस जमा करवाने के फरमान का एसएफआई ने विरोध किया है। कहा कि कोरोनाकाल में जब लोगों के रोजगार जा चुके हैं तथा आय के साधन घटे हैं तो ऐसे समय में संस्थान को राहत देनी चाहिए। लेकिन संस्थान उल्टा छात्रों पर फीस जमा करवाने का दबाव बना रहा है। उन्होंने इसकी निंदा करते हुए कहा कि पिछले सत्र से अब तक सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से कक्षाएं लगी हैं। संस्थानों के खर्चे बहुत कम रहे हैं, ऐसे में संस्थान और सरकार छात्रों की फीस या तो माफ करें या इसमें रियायत दें। यूजी की परीक्षा से पहले हर छात्र को टीका लगवाना सुनिश्चित करने और फीस माफ करने की मांग भी निदेशक से की गई।
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