विश्व-विख्यात रोहतांग दर्रा करीब तीन सप्ताह में बहाल होगा। इसके लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने पूरी ताकत लगा दी है। मनाली से सरचू तक के लिए माइनस 20 डिग्री तापमान में बीआरओ की तीन टीमें मशीनरी के साथ बर्फ के पहाड़ काटने में लगी हैं।
बीआरओ ने अप्रैल के अंत तक रोहतांग दर्रा बहाल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, बर्फीली हवाओं और अन्य अड़चनों के चलते यह कार्य मई प्रथम सप्ताह तक पहुंच सकता है। सामरिक दृष्टि से अहम करीब 480 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह मार्ग को बहाल करने के लिए हिमाचल सीमा में दीपक प्रोजेक्ट कार्य कर रहा है।
जिसके अधीन सरचू तक करीब 280 किलोमीटर सड़क है। जबकि अन्य हिस्सा जम्मू-कश्मीर में हिमांक प्रोजेक्ट के पास है। मनाली से रोहतांग, स्तींगिरी से रोहतांग और स्तींगिरी से सरचू के लिए स्नो क्लीयरेंस मिशन पर तीन टीमें तैनात हैं। मनाली से रोहतांग के लिए निकली टीम राहनीनाला से करीब तीन किलोमीटर पीछे है। यहां से लक्ष्य करीब दस किलोमीटर दूरी पर है।
स्तींगिरी से रोहतांग के लिए निकली टीम ग्रंफू के पास पहुंची है। यहां से करीब 14 किलोमीटर तक बर्फ हटाना बाकी है। वहीं, स्तींगिरी से सरचू को निकली टीम दारचा के पास पहुंची है। 23 मार्च से शुरू हुए स्नो क्लीयरेंस मिशन में मार्च आखिर में हुई बर्फबारी रोड़ा बनी है।
इधर, बीआरओ के कर्नल मयंक मेहता ने कहा कि रोहतांग दर्रा तक स्नो क्लीयर करने के लिए अप्रैल आखिर तक का लक्ष्य रखा है। माइनस तापमान के बीच जवान स्नो क्लीयरेंस मिशन के लिए अग्रसर हैं।
मई अंत तक बहाल होगा मनाली से सरचू मार्ग
मनाली से सरचू तक मार्ग बहाली के कार्य का लक्ष्य मई आखिर तक रखा गया है। वर्तमान में बीआरओ रोहतांग बहाली के लिए जुटा हुआ। हालांकि, एक टीम सरचू की ओर बढ़ रही है। जबकि दो टीमें विपरीत दिशाओं से रोहतांग की तरफ बढ़ रही हैं।