ऐतिहासिक रिज मैदान से सटे भवनों में आखिर कहां से पानी रिस रहा था, इसका खुलासा हो गया है। इसका पता लगाया है ब्रिटिशकाल के कनटेक यंत्र ने।
दशकों पुराना यह यंत्र नगर निगम शिमला के पास बचा था। हाल ही में जब निगम के कर्मचारियों ने इसकी मदद से रिज पर परीक्षण किया तो पाया कि भवनों में यह रिसाव पाइप लाइन में लीकेज से हो रहा है।
यह पाइप जमीन के काफी अंदर दबी पड़ी है। आज तक कोई इंजीनियर इसका पता नहीं चला पाया था कि आखिर शहर के भवनों में यह पानी का रिसाव कहां से हो रहा है।
एमसी के कुछ कर्मचारी ही चला पाते हैं कनकेट
नगर निगम के अनुसार कनकेट यंत्र अंग्रेजों के समय में पाइपलाइन में लीकेज का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होता था। नगर निगम में ऐसे चंद ही कर्मचारी है जो इसका इस्तेमाल करना जानते हैं।
बिल्कुल शांत माहौल में इसके जरिए आवाज सुनकर लीकेज का पता लगाया जाता है। यह यंत्र काफी हद तक कामयाब साबित होता है।
इस यंत्र से लीकेज का पता लगने के बाद अब नगर निगम ने रिज मैदान की जेसीबी से खुदाई शुरू करवा दी है।
वीरवार से शुरू हो गई खुदाई
निगम ने वीरवार सुबह से रिज की खुदाई शुरू करवा दी। शाम तक दो जगह हल्की लीकेज का पता चल गया है।
करीब तीन दिनों तक लीकेज जांचने का काम चलेगा। इससे पहले भी कई बार रिज की खुदाई की जा चुकी है।
इसके बाद 15 अप्रैल की परेड के लिए रिज मैदान को कंक्रीट से संवारा जाएगा। रिज मैदान से सटे पद्मदेव कांप्लेक्स में पानी का रिसाव होने का मुख्य कारण फीडर लाइन में लीकेज ही है।
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने बताया है कि निगम के वास्तुकार एवं योजनाकार शाखा में लीकेज की समस्या बीते लंबे समय से आ रही है। इसे दुरुस्त करने के लिए रिज मैदान में खुदाई की है।