कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना से जुड़े कुछ अन्य अधिकारी भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं। सीबीआई उनकी भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा और अधिक विस्तृत हो सकता है। पेट्रोल पंप को एनओसी दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने से जुड़े इस मामले में आरोप है कि महिला आर्किटेक्ट ने परियोजना निदेशक के नाम पर यह राशि मांगी थी। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी और प्रारंभिक पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। जांच के दौरान सीबीआई ने कुछ दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे प्रकरण में और कौन-कौन अधिकारी या कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।