हिमाचल के सरकारी स्कूलों में नियुक्त साढ़े 12 हजार अस्थायी शिक्षकों को नियमित करने पर आने वाले वित्तीय खर्च को लेकर मंथन शुरू हो गया है। शनिवार को सरकार ने उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने अस्थायी शिक्षकों से संबंधित श्रेणीवार ब्योरा देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट से पैट, पैरा, पीटीए और ग्रामीण विद्या उपासकों के हक में फैसला आने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। उधर, शनिवार को सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल बैठक में भी इस मामले पर चर्चा हुई।
पीटीए और पैट को बीते वर्ष से नियमित शिक्षकों के बराबर वेतन देने से सरकार पर बहुत अधिक वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। कोर्ट में मामला विचाराधीन होने से सरकार इन शिक्षकों को नियमित नहीं कर पा रही थी। इन्हें साल 2019 में जयराम सरकार ने नियमित शिक्षकों के बराबर वित्तीय लाभ देने का फैसला लिया था। इससे पहले नौ दिसंबर 2014 को हाईकोर्ट से अस्थायी शिक्षकों के हक में फैसला आने पर सरकार ने दस साल का सेवाकाल पूरा कर चुके पैरा शिक्षकों को नियमित कर दिया था।
सात साल का कार्यकाल पूरा कर चुके पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर ला दिया था। हिमाचल में अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां पिछले 17 वर्षों में हुई हैं। इनमें ग्रामीण विद्या उपासकों की नियुक्ति 2002-03 में हुई। साल 2003 से लेकर 2007 तक प्राथमिक सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां प्रारंभिक शिक्षा विभाग में हुई। 2004 में पैरा शिक्षकों की भर्तियां हुई। 2006 से पीटीए शिक्षकों की भर्ती हुई थी। प्रदेश में वर्तमान में 12,472 अस्थाई शिक्षक हैं। इनमें 2172 पैरा, 6799 पीटीए और 3501 पैट शामिल हैं।