जब दिमाग की एक नस में अचानक खून पहुंचना बंद हो जाए तो उसे ब्रेन अटैक कहते हैं। यह तब होता है, जब दिमाग तक ब्लड पहुंचने में रुकावट आती है। इससे ब्रेन के प्रभावित हिस्से की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं।
ब्रेन अटैक और ब्रेन हेमरिज में अंतर
ब्रेन अटैक और ब्रेन हेमरिज दोनों में काफी अंतर है। जब दिमाग की नस खून की सप्लाई कम करे तो उसे छोटा ब्रेन अटैक कहते हैं। जब नस ब्लाक हो जाए तो उसे एस्केमिक यानी ब्रेन अटैक कहते हैं और जब दिमाग की नस फट जाए तो उसे ब्रेन हेमरिज कहते हैं। यह 20 में से 3 लोगों में होता है। ब्रेन हेमरिज उन लोगों में ज्यादा होने की संभावनाए होती हैं, जिनका बीपी अनकंट्रोल होता है। खास तौर पर सुबह चार बजे। इस दौरान लोगों का सबसे ज्यादा बीपी हाई होता है।
ब्रेन अटैक के क्या लक्षण हैं?
1. चेहरे, बाजू व टांग में अचानक कमजोरी।
2. अचानक बोलने व समझने में कठिनाई।
3. अचानक एक या दोनों आंखों से दिखाई न देना।
4. अचानक चलने-फिरने में कठिनाई, शरीर का संतुलन बनाए रखने में कठिनाई।
5. बिना किसी कारण अचानक तेज सिर दर्द।
इन्हें ब्रेन स्ट्रोक की संभावना ज्यादा
1. उम्रदराज
2. ब्रेन स्ट्रोक की फैमिली हिस्ट्री
3. स्मोकिंग करने वालों को
4. दिल के मरीज
5. शुगर के मरीज
6. कॉलस्ट्राल के मरीज
7. ब्लड प्रेशर के मरीज
ऐसे बचे ब्रेन स्ट्रोक से
1. बीपी को कंट्रोल करें।
2. धूम्रपान से बचें।
3. कॉलेस्ट्राल युक्त खाना खाने से बचें।
4. रोजाना सैर करें।
5. फल और हरी सब्जियां खाएं।
6. शुगर कंट्रोल रखें।
7. मोटापा व शराब से बचें।
स्ट्रोक के खिलाफ पीजीआई की लड़ाई
स्ट्रोक के मरीजों के इलाज के लिए पीजीआई का न्यूरोलाजी डिपार्टमेंट काफी काम कर रहा है। इसके लिए पीजीआई का एक स्ट्रोक प्रोग्राम है। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर है। हर साल विश्व स्ट्रोक के दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। इस बार 12 से 15 नवंबर तक कार्यक्रम होंगे।
इसके अतिरिक्त न्यूरो रिहैबिलिटेशन क्लीनिक और टेली स्ट्रोक पर काम चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक स्ट्रोक के बाद न्यूरो रिहैबिलिटेशन की जरूरत पड़ती है। इसमें फिजियोथैरेपी की अहम भूमिका होती है। इस साल यह क्लीनिक शुरू कर दिया जाएगा। इसकी ओपीडी हर बुधवार को होगी। टेली स्ट्रोक के तहत जीएमसीएच 32 और जीएमएसएच 16 के स्टाफ को ब्रेन स्ट्रोक के प्रति जागरूक किया जाएगा।