हिमाचल सरकार ने बहुचर्चित ब्रैकल मामले की फाइल फिर खोल दी है। प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के सहारे पावर प्रोजेक्ट हासिल करने और अपफ्रंट मनी को लेकर चल रही जांच राज्य विजिलेंस ब्यूरो ने अब नए सिरे से शुरू कर दी है। 260 करोड़ रुपये का अपफ्रंट मनी न लौटाने के फैसले के बाद सरकार अब अन्य गड़बडि़यों को फिर से खंगाल रही है। सूत्रों की मानें तो हाल ही में सरकार ने लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान इस मामले की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में ब्रैकल कंपनी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ब्रैकल कारपोरेशन को अलॉट हुए जंगी थोपन पोवारी प्रोजेक्ट की अलाटमेंट को निरस्त कर दिया था। इसके बाद यह मामला सुर्खियोें में आया। जांच एजेंसी को संदेह है कि देश के नामी अदानी ग्रुप ने ब्रैकल कंपनी के सहारे इस प्रोजेक्ट को हासिल करने का प्रयास किया था, लेकिन कोर्ट की कार्रवाई से मामला उलझ गया। कंपनी ने सरकार से अपफ्रंट मनी लौटाने की मांग की जिसे पहले तो सरकार ने मान लिया लेकिन इस बीच मामले में फर्जी दस्तावेजों के सहारे प्रोजेक्ट हासिल करने की बात सामने आ गई।
इसके बाद सरकार ने मामले में विजिलेंस जांच शुरू कर दी। लंबे समय तक मामला इस बात को लेकर उलझा रहा कि जांच होनी है या नहीं। चूंकि अदानी ग्रुप का नाम आ रहा था, ऐसे में जांच अधिकारी सरकार के रुख के अनुसार ही कदम बढ़ाना चाह रहे थे। हाल ही में मंत्रिमंडल ने ब्रैकल कंपनी को 260 करोड़ से ज्यादा का अपफ्रंट मनी देने से एक बार फिर इंकार कर दिया है। यह फैसला प्रदेश हाईकोर्ट के ब्रैकल कंपनी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार से दोबारा विचार करने के निर्देश देने के बाद लिया है।