वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष तारा सेन ठाकुर
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‘आसमानी आलू’ यानी यम की पैदावार की प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। आलू की तरह दिखने वाले यम की दो किस्में प्रदेश में किसान उगा सकते हैं। इसे नकदी और वाणिज्यिक फसल के तौर पर विकसित किया जा सकता है। वल्लभ महाविद्यालय मंडी में वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष और स्थानीय पेड़ पौधों की विशेषज्ञ तारा सेन ठाकुर ने इस आशय की जानकारी दी है।
उन्होंने दावा किया है कि यम अपने स्थानीय नाम तरडोलू और दरेगल के नाम से भी प्रसिद्ध है। यम सब्जी की ये दोनों किस्में वानस्पतिक परिवार डायोस्कोरासी के जीनस डायोस्कोरिया की सदस्य हैं। तारा सेन ठाकुर ने दावा किया है कि मंडी शहर के आसपास के गांव के लोग पहले से ही इस तकनीक को अपनाकर तरड़ी और यम को विकसित करने में कामयाब रहे हैं। यम की प्रजातियां बुलबिल और भूमिगत कंद दोनों ही औषधीय और पौष्टिक गुणों से भरपूर हैं।