समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से की जा रही करीब आठ करोड़ रुपये की पुस्तकों की खरीद प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच नया खुलासा हुआ है। बीते वर्ष खरीदी गई करोड़ों की पुस्तकें अभी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नहीं पहुंची हैं। बीते वर्ष परियोजना कार्यालय ने निजी प्रकाशकों और एनसीईआरटी से पुस्तकों की खरीद की थी।
निजी प्रकाशकों ने तो पुस्तकों की सप्लाई कर दी है, लेकिन कोरोना संकट के चलते एनसीईआरटी की सप्लाई अभी नहीं मिली है। पुस्तकें हिमाचल लाने के लिए इन दिनों गाड़ियों के टेंडर करने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कोरोना संकट में बीते वर्ष की सप्लाई ही नहीं पहुंची है तो दोबारा कोरोना कर्फ्यू की बंदिशों के बीच नई पुस्तकों की खरीद करने में जल्दबाजी क्यों की गई?
पुस्तकों की खरीद प्रक्रिया में फर्मों का चयन करने के तरीके पर उठे सवालों के बीच मामले की जांच शुरू हो गई है। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक सभी चयनित कंपनियों के जीएसटी नंबर, पैन कार्ड नंबर, इन्कम टैक्स रिटर्न और पंजीकृत ई-मेल आईडी को खंगाल रहे हैं। तीन-चार दिन में यह जांच पूरी होने के आसार हैं। उधर, शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने कहा कि जांच में फर्जी पाए जाने वाली फर्मों को खरीद प्रक्रिया से बाहर किया जाएगा। भविष्य के लिए इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
हिमालय साहित्य मंच ने मांगी उच्च स्तरीय जांच
हिमालय साहित्य मंच ने पुस्तक खरीद मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मंच के अध्यक्ष एसआर हरनोट ने कहा कि इस तरह के आरोप सीधे-सीधे साहित्य और सांस्कृतिक पर कलंक की तरह हैं। हिमाचल के लेखकों की आए दिनों दर्जनों किताबें प्रकाशित होती रहती हैं। बहुत से नए और वरिष्ठ लेखक अपने साधनों से किताबें छपवाते हैं, लेकिन मुश्किल से शिक्षा विभागों के पुस्तकालयों तक उनकी किताबें पहुंचती हैं। शिक्षा विभाग के पास करोड़ों का बजट होता है। उन्होंने मांग की है कि हिमाचल के लेखकों के लिए 50 प्रतिशत बजट होना चाहिए। पुस्तक चयन समिति में हिमाचल के वरिष्ठ लेखक भी रहने चाहिए।