उसका दुराचार के बाद कत्ल कर दिया गया। पुलिस ने जिनको बलात्कारी और कातिल बताकर सलाखों के पीछे पहुंचाया, वे सब सीबीआई की नजर में निर्दोष हैं। सीबीआई ने साढे़ चार फुट के एक चिरानी नीलू को दुराचारी और हत्यारा बताकर मामला सुलझा लेने का दावा किया। उसने ये सब कैसे किया, इसकी कहानी जनता के गले नहीं उतर रही।
बेशक सीबीआई डीएनए के सौ फीसदी मिलान की बात कर रही हो। गुड़िया को इंसाफ दिलाने के लिए जनांदोलन खड़ा करने वाली तनुजा थापटा ने लेखक अश्वनी शर्मा के सहयोग से ‘गुड़िया अनसुनी चीख...’ पुस्तक लिखकर ऐसे ही कई सवाल इस किताब में खड़े किए हैं।
यही सवाल गुड़िया के पिता के भी हैं। इंसाफ को भगवान भरोसे छोड़ते हुए तनुजा थापटा और अश्वनी शर्मा आखिर में लिखते हैं - तेरा इंसाफ होकर ही रहेगा, तेरी चीख अनसुनी चीख नहीं रहेगी, क्योंकि मैंने खुद पहाड़ों को प्रत्युत्तर की शक्ति दी है।
महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास किताब को हवा में लहराते हुए गुड़िया के पिता नम आंखों से मीडिया के सामने चिल्ला रहे थे - मेरी गुड़िया का हत्यारा अकेला चिरानी नहीं हो सकता? इसमें बडे़ लोगों का हाथ है।
वह अगर विधायक की बेटी होती तो क्या उसे भी ऐसा ही इंसाफ मिलता? गुड़िया को इंसाफ नहीं मिलेगा तो दरिंदे किसी की भी बेटी को ऐसे ही शिकार बनाते रहेंगे।