तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि सभी प्रमुख धार्मिक परंपराएं मूल रूप से प्रेम, दया और क्षमा का ही संदेश देती हैं। उन्होंने अनुयायियों से कहा कि वह इन्हें अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। दया का भाव ही इंसान का सबसे बड़ा धर्म है। दलाईलामा मनाली में चल रहे तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन में अनुयायियों को ज्ञान बांट रहे थे।
उन्होंने कहा कि ज्ञान, दया और क्षमा इंसान को बड़ा बनाती है। खुशहाली मिलती नहीं, बल्कि उसके लिए कदम बढ़ाने पड़ते हैं। अपनी क्षमताओं को जान कर और उनमें यकीन कर ही एक बेहतर विश्व का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपने साथ दूसरों को भी खुश रखने के लिए करुणा का भाव रखना आवश्यक है। इंसान का धर्म दयालुता होना चाहिए। सच्चा हीरो वही है, जो अपने क्रोध को जीत लेता है।
अनुयायी टशी, पलजोर, सोनम, दोरजे और डोलमा ने कहा कि वह दलाईलामा के प्रवचनों को सुनकर खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार सुबह मनाली में बारिश का दौर था, लेकिन दलाईलामा के प्रवचन शुरू होते ही मौसम एकाएक शुष्क हो गया। धर्मगुरु दलाईलामा 27 अगस्त तक मनाली में रहेंगे।
आर्य अवलोकितेश्वर का अभिषेक आज
हिमालयन बुद्धिस्ट सोसायटी के मुख्य संरक्षक रवि ठाकुर ने बताया कि तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा के प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि वीरवार को आर्य अवलोकितेश्वर का अभिषेक होगा, जिसमें बड़ी संख्या में अनुयायी आएंगे।