यह राज्य मंत्री के बराबर का पद है। बोर्डों-निगमों और अन्य अर्द्धसरकारी या सरकारी नियंत्रण की संस्थाओं में भी दो दर्जन अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और इसी के समकक्ष पद भरने पर विचार चल रहा है। इनके लिए एक अनार सौ बीमार की स्थिति बनी हुई है। सीएम कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि हो सकता है कि यह दूसरी सूची भी नवरात्र में ही जारी हो।
सीएम जयराम कई पदों को लोकसभा चुनाव के बाद तक खाली भी छोड़ सकते हैं। अंदर की जानकारी रखने वालों की मानें तो चुनाव से पहले वह किसी को नाराज नहीं करना चाहेंगे। दरअसल, ओहदे दो दर्जन या इसके आसपास हैं और इनके तलबगार कई गुणा हैं। ऐसे में हो सकता है कि सीएम एक साथ सभी पदों पर ताजपोशियों का जोखिम न लें और लोकसभा चुनाव में नेताओं के प्रदर्शन को देखते हुए ही पद बांटे जाएं।