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Shimla News: शिलारू में तैयार हो रहा जिले का पहला ब्लूबेरी का बगीचा

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एक्सक्लूसिव
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पहले चरण में पॉलीहाउस में दो हजार वर्ग मीटर में लगाए गए हैं 1,900 पौधे
ट्रायल सफल होने के बाद बागवानों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
बाजार में 1000 से 3000 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिकता फल
भारती शर्मा
शिमला। उद्यान विभाग की ओर से शिमला के शिलारू क्षेत्र में जिले का पहला ब्लूबेरी बगीचा तैयार किया जा रहा है। इससे बागवानों के लिए आय का नया द्वार खुलेगा। ब्लूबेरी एक ऐसी फसल है जिसकी देश-विदेश दोनों में अच्छी मांग है और इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
परियोजना के पहले चरण में शिलारू स्थित बागवानी परिसर में पॉलीहाउस तकनीक के तहत लगभग दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में 1,900 ब्लूबेरी के पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों को जलवायु और मिट्टी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है। ब्लूबेरी का पौधा दो से तीन साल बाद फल देना शुरू कर देता है। एक वयस्क पौधे से सालाना तीन से पांच किलो तक फल लगते हैं। फूल आने के बाद बेर पकने में लगभग 45 से 60 दिन लगते हैं। फल नीले रंग के होने पर तोड़े जाते हैं।
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बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लूबेरी की खेती के लिए नियंत्रित तापमान, नमी और मिट्टी का पीएच स्तर बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी कारण प्रारंभिक चरण में पॉलीहाउस में इसका ट्रायल किया जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे खुले खेतों और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में भी विस्तारित करने की योजना है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना है। यह फल बाजार में 1000 से 3000 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिकता है। स्थानीय किसानों और बागवानों में इस नई पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
उद्यान विभाग की ओर से सेब, नाशपाती और आड़ू जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम कर बागवानों किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है जो कम क्षेत्र में अधिक मुनाफा दे सकें। ब्लूबेरी उनमें से एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रही है। परियोजना के सफल परिणाम सामने आने के बाद स्थानीय बागवानों को ब्लूबेरी की खेती से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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इनसेट
ब्लूबेरी खाने में स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए फायदेमंद
ब्लूबेरी खाने में स्वादिष्ट होने के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। ब्लूबेरी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा मधुमेह, ब्लड प्रेशर, वजन को कम करने में लाभकारी होती है। इसमें अधिक मात्रा में विटामिन सी भी पाया जाता है। फल के अलावा इसके पत्ते भी बहुत लाभकारी होते हैं। जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन के अनुसार ब्लूबेरी की पत्तियों में एंथोसियानीडीनस नामक तत्व भारी मात्रा में पाया जाता है जो न्यूरोलॉजिकल रोगों, हृदय रोगों, कैंसर, सूजन और एथेरोस्क्लेरोसिस को रोकने में मदद करते हैं।
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कोट
नर्सरी तैयार होने के बाद बागवानों को भी बांटे जाएंगे पौधे
शिलारू में पॉलीहाउस में ब्लूबेरी का बगीचा तैयार किया जा रहा है। इसमें नर्सरी तैयार होने के बाद बागवानों को भी पौधे बांटे जाएंगे और उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जलवायु परिवर्तन के कारण पारंपरिक फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ रहा है। ऐसे में बागवानों के लिए जरूरी हो गया है कि वे समय के साथ नई और लाभकारी फसलों को अपनाएं। ब्लूबेरी की बहुत डिमांड है। -विनय सिंह, निदेशक, उद्यान विभाग हिमाचल प्रदेश
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