मौसम की मार के चलते टमाटर की फसल ब्लाइट रोग की चपेट में आ गई है। बीमारी के प्रभाव से पौधों के पत्ते पीले होकर झड़ रहे हैं और पौधों पर काले धब्बे पड़ गए हैं। इससे टमाटर के पौधे सड़कर गिरने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक बेमौसमी बारिश के कारण यह समस्या पेश आई है। टमाटर का उत्पादन करने वाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचना शुरू हो गई है।
आजकल बल्ह घाटी में गुटकर से लेकर बग्गी, हटगढ़, डडोह ढाबण, लोहारा नलसर, भियूरा, राजगढ़, स्टोह, खांदला, कुम्मी घटा, टांवा, सकरोआ गागल, चंडयाल, सिहन, भडयाल बैहना, चक्कर, नागचला रत्ती साई समेत समूचे क्षेत्र में टमाटर की फसल प्रभावित हुई है। घाटी में करीब 10,000 हेक्टेयर भूमि में टमाटर की खेती होती है। टमाटर यहां के किसानों की आर्थिकी का मुख्य साधन है। इस समय टमाटर के पौधों में फ्लावरिंग हो रही है।
हिमाचल किसान यूनियन के राज्य महासचिव सीता राम, जिला प्रधान भूप सिंह, सुंदरनगर ब्लॉक के प्रधान हेमराज शर्मा, सयोहली यूनिट के प्रधान भगत राम, दुनी चंद, गगन शर्मा ने बताया कि टमाटर की फसल ब्लाइट रोग की चपेट में आ गई है। तना और पत्ते काले पड़ने के बाद सूख रहे हैं। जानकारी के अभाव में किसान दवा नहीं खरीद पा रहे हैं। टमाटर की फसल ही एकमात्र प्रमुख नकदी फसल है। इसी से परिवार का गुजर बसर चलता है। सरकार और विभाग को उचित कदम उठाने चाहिए।
कृषि विकास अधिकारी मंडी डॉ. रमेश चंद ने कहा कि बेमौसमी बारिश और पौधे अधिक घने होने के कारण ब्लाइट रोग पनपता है। बीज विक्रय केंद्रों में दवा उपलब्ध है। पौधे के जिस पत्ते और टहनी में रोग के लक्षण दिखाई देते हैं, उसको वहां से काट कर हटा देने से बीमारी फैलने से रुक जाती है।
- डॉ. रमेश चंद, कृषि विकास अधिकारी मंडी