किन्नौर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है काला जीरा
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। गेयटी थियेटर में आयोजित आदि बाजार में किन्नौर का काला जीरा लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। इसे डायबिटीज (मधुमेह) और कोलेस्ट्रॉल सहित अन्य बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा जोड़ों के दर्द में भी लाभकारी बताया जा रहा है।
गेयटी में आयोजित बाजार में जंगलों से एकत्रित किया यह जीरा तीन हजार रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से बिक रहा है। स्टॉल संचालक दलीप ने बताया कि इसके नियमित सेवन से व्यक्ति अपने शरीर को अनेकों बीमारियों से बचा सकते हैं। बताया कि जीरा दो प्रकार का होता है। एक साधारण जीरा जिसकी बिजाई की जाती है। यह जीरा बाजार में हर जगह आसानी से मिल जाता है और एक काला जीरा होता है, इसे उगाया नहीं जाता। काला जीरा प्राकृतिक तरीके से जंगलों में उगता है। किन्नौर के जंगलों में यह जीरा ज्यादा पाया जाता है। इसकी मांग बाहरी राज्यों में सबसे ज्यादा है। लोगों का मानना है कि वजन कम करने के लिए काले जीरे के प्रयोग की सबसे आसान विधि है कि इसका सेवन गर्म पानी के साथ करें। इसके अलावा काले जीरे के कुछ बीज चबाकर गर्म पानी पी सकते हैं। काले जीरे के बीज को रातभर के लिए पानी में भिगोकर छोड़ दें और सुबह इसे गर्म करके पी लें। जनजातीय कार्य मंत्रालय और केंद्र सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में ट्राइफेड की ओर से आदि बाजार में जनजातीय कारीगरों के बनाए उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इसमें मध्य प्रदेश, भोपाल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उतराखंड, आंध्र प्रदेश और हिमाचल सहित अन्य राज्यों के कारीगर भाग ले रहे हैं।