पिछले कुछ दिनों से शासन में बैठे आला अधिकारियों से लेकर निदेशालयों के अधिकारी अपने विभागों से संबंधित दृष्टिपत्र के वायदों को लेकर मंथन में जुटे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस बात पर खास जोर दिया है कि चुनावों से पहले दृष्टिपत्र में जो वायदे किए गए, उन्हें स्कीम और बजट के साथ जमीन पर उतारने का काम शुरू किया जाए, ताकि वायदे पूरे कर उनका विश्वास जीता जा सके।
यूं तो भाजपा ने सत्तासीन होने से पहले दृष्टिपत्र में भारी भरकम घोषणाएं की थीं, लेकिन अब देखना यह है कि सरकार में बैठने के बाद अब भाजपा खुद उनमें से कितनी को जमीन पर उतार पाती है और कितनी को खुद ही खारिज करती है।