विधायक सुरेश भारद्वाज प्रेसवार्ता करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा ऐसे भवन हैं जिन्हें नियमित किया जाना है। अध्यादेश आए हुए 22 दिन का वक्त बीत चुका है लेकिन अब तक महज करीब 138 आवेदन ही आए हैं। प्रदेश सरकार ने यह अध्यादेश केवल बिल्डर लॉबी को खुश करने के लिए लाया है। यह आरोप शिमला शहर के विधायक सुरेश भारद्वाज ने प्रेसवार्ता के दौरान लगाया।
भारद्वाज ने कहा कि आम जनता को इससे कोई राहत नहीं मिल रही है। इस अध्यादेश का फायदा केवल खास को ही मिलेगा । उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने इस कार्यकाल के दौरान दूसरी बार ये अध्यादेश लाई है। पहले जो अध्यादेश लाया गया था उसे विरोध के बाद विड्रो कर लिया गया। उसके बाद विधानसभा में इसे लाने की तैयारी थी लेकिन इसे पेश नहीं किया जा सका। कैबिनेट में इसे मंजूर कर लागू कर दिया गया है।
सुरेश भारद्वाज ने कहा कि यदि सरकार कानून का अध्ययन करती और उसके बाद लोगों से सुझाव मांग कर सही तरीके से विधानसभा में इसे पेश किया जाता तो अच्छा होता। बार बार इसे लाकर और फिर विड्रो कर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
टीसीपी अध्यादेश में एज इटिज वेयर इटिज के आधार पर भवनों को नियमित करने की बात कही गई है लेकिन इसमें 30 फीसदी सेट बैक की शर्त लगाई गई है। भवन नियमित करने के लिए फीस इतनी ज्यादा है कि आम जनता को इसे चुकाना मुश्किल है। विधायक ने कहा कि एज इटिज वेयर इटिज नाम केवल आम जनता को गुमराह करने के लिए है।