पूर्व केंद्रीय संचार राज्य मंत्री पंडित सुखराम की वीरभद्र से अंदरखाते तनातनी भाजपा के काम आई, जबकि सुखराम के बेटे अनिल शर्मा तत्कालीन वीरभद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इस बार बदली परिस्थितियों में केंद्र और हिमाचल में अपनी सरकारें भाजपा के लिए लाभप्रद हैं। मंडी से मुख्यमंत्री होने के साथ पंडित सुखराम भाजपा के साथ हैं और उनके पुत्र अनिल शर्मा जयराम सरकार में भी कैबिनेट मंत्री हैं।
मगर पंडित सुखराम मौजूदा सांसद के स्थान पर अपने पोते के लिए टिकट मांगकर समीकरण बिगाड़ने के संकेत दे रहे हैं। मंडी लोकसभा सीट से महेश्वर सिंह भी दो बार सांसद रह चुके हैं जो अलग खेमे से हैं। वीरभद्र इसी सीट से सांसद रहते मनमोहन सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं।
उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह भी यहीं से दो बार सांसद रही हैं। भाजपा के सामने ऐसी कई चुनौतियां हैं। प्रदेश भाजपा की राजनीति के जानकारों का कहना है कि मतदाता सूचियों के एक-एक पन्ने के करीब 30 हजार प्रमुखों की नब्जें टटोलने के लिए पहला सम्मेलन मंडी में हो रहा है।