गद्दी समुदाय पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कथित टिप्पणी के बाद अब गद्दी वोट बैंक पर सियासत का खेल शुरू हो गया है। तथाकथित टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का डैमेज कंट्रोल के लिए धर्मशाला पहुंचना, नड्डी में प्रदर्शनकारियों का सीएम को
काले झंडे दिखाना और लाठीचार्ज की घटना, पूर्व मंत्री एवं गद्दी नेता किशन कपूर के नेतृत्व में भाजपा की रोष रैली, नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल का समर्थन देना, सभी कड़ियां वोट बैंक के सियासी खेल का हिस्सा बनती गईं।
वीरवार को भी गद्दी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष होने का दावा करने वाले जोगिंद्र पाल और कुछ लोगों की ओर से प्रेस वार्ता कर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का बचाव करने के पीछे कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल की बानगी दिखी।
दोनों दल गद्दी वोट बैंक को साधने की फिराक में हैं, लेकिन सच यह भी है कि पिछले साढ़े चार वर्ष में दोनों दलों को गद्दी समुदाय के आम आदमी तक पहुंचने की याद नहीं आई।
दरअसल, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तथाकथित विवादास्पद टिप्पणी पर हंगामा इसलिए मचा, क्योंकि कांगड़ा-चंबा और मंडी संसदीय क्षेत्र की करीब 13 विधानसभा सीटों पर गद्दी वोट बैंक जीत और हार के लिए सीधा प्रभाव डालता है। कांगड़ा और मंडी संसदीय क्षेत्र में गद्दी समुदाय का करीब साढ़े 3 से 4 लाख का वोट बैंक है।