भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हम सदन को चलाना चाहते हैं। बुधवार सुबह सर्वदलीय बैठक में भी हमने इसको लेकर अपना पक्ष साफ तौर पर रखा।
बैठक के बाद जब लिस्ट ऑफ बिजनेस देखा तो उसमें पिछले कल का एजेंडा भी था। यह नियमों का सरासर उल्लंघन था। नियम 101 के तहत विपक्ष के सदस्य का प्रस्ताव बैलेट के द्वारा पहले ही लगा है।
उसी के साथ नियम 130 के तहत कांग्रेस का नोटिस लगा। हमने कहा कि आप प्राइवेट मेंबर डे के दिन कांग्रेस के इस नोटिस पर चर्चा करवा सकते हैं, लेकिन उससे पहले कांग्रेस के इस नोटिस पर दूसरी चर्चा नहीं हो सकती। विस अध्यक्ष से इस चर्चा को लिस्ट ऑफ बिजनेस से हटाने की मांग की। यह भी कहा कि हम हाउस को चलाएंगे।
बातचीत के दौरान संसदीय कार्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी मान रहे थे। इसके बाद मुकेश अग्निहोत्री सीएम से मिलने गए, लेकिन शायद वहां उनकी बात मानी नहीं गई। साफ है कि विस अध्यक्ष एक पक्ष के दबाव में काम कर रहे हैं।
विस अध्यक्ष ने सदन में भी कहा था कि विपक्ष मेरे चैंबर में आकर बात कर ले। वह इसके लिए 10 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करेंगे। लगता है कि उन पर एक पक्ष का दबाव था।
पहले बात कहने के बाद वह मुकर गए। लगता है कि उन्हें अपने टिकट की भी चिंता है। पिछले चार वर्षों के रिकॉर्ड में जितने भी जनहित के सवाल हुए, वे केवल बीजेपी ने उठाए हैं। कांग्रेस के किसी भी सदस्य ने सदन में जनहित के मुद्दे नहीं उठाए।
हमारा विरोध सिर्फ नियमों को लेकर है। हमारे साथ बैठक में सहमति बनने के बाद संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री अपने विधायक दल में बात नहीं मनवा पाए। साफ है कि कांग्रेस चाहती नहीं कि सदन चले। यह सत्तापक्ष की असफलता है।