डॉ. जनक सुबह 11:15 बजे विजिलेंस मुख्यालय पहुंचे। इसके बाद जांच टीम ने अपराह्न 3:15 बजे तक उनसे हिमकेयर दावों, बिलों की जांच, भुगतान प्रक्रिया, प्रशासनिक फैसलों और खरीद टेंडर से जुड़े सवाल किए। उनसे यह भी पूछा गया कि योजना के सही क्रियान्वयन में अहम जिम्मेवारी आपकी थी, बावजूद इसके दवाओं के टेंडर प्रक्रिया में कमियां क्यों रही? इस पर डॉ. जनक ने कहा कि पुराना रिकॉर्ड देखे बिना वह सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब नहीं दे सकते। विजिलेंस यह जांच भी कर रही है कि वर्ष 2018 के बाद संस्थान में खरीद और निविदा प्रक्रिया की किस तरह समीक्षा हुई।
200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका
हिमकेयर योजना में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। जांच में ऐसे निजी अस्पतालों को योजना के तहत इंपैनल किए जाने के तथ्य सामने आए हैं, जिनकी सुविधाओं और आधारभूत ढांचे को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में दो कमरों में संचालित होने वाले और पर्याप्त सुविधाएं न होने के बावजूद कुछ अस्पतालों को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद इन अस्पतालों में मरीजों के उपचार, बिलिंग और सरकार से किए गए दावों की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। विजिलेंस अलग-अलग अस्पतालों में मरीजों की संख्या, उपचार का रिकॉर्ड, बिलिंग और सरकार की ओर से जारी भुगतान का मिलान कर रही है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि अस्पतालों के इंपैनलमेंट के दौरान निर्धारित नियमों और मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
भाजपा के दो विधायकों और तीन पूर्व एमएलए से हो चुकी है पूछताछ
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस में केस दर्ज है। उनसे इस मामले में विजिलेंस ने मंगलवार को पूछताछ की थी। वहीं, आशीष शर्मा से एक अन्य मामले में पूछताछ हो चुकी है। इसके अलावा, पूर्व विधायक होशियार सिंह से सरकारी धन के दुरुपयोग मामले में विजिलेंस ने केस दर्ज किया है। वहीं, पूर्व विधायक केएल ठाकुर और चैतन्य शर्मा से भी अलग-अलग मामलों में पूछताछ की जा चुकी है।