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चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर अड़ी भाजपा, राजभवन पहुंचा मामला

Sun, 14 May 2017 11:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नगर निगम शिमला के चुनाव तय समय से करीब एक महीना आगे खिसकाने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मिले। शनिवार को मुलाकात के दौरान धूमल ने राज्यपाल से मांग की कि वे तत्काल हिमाचल के निर्वाचन आयुक्त को बर्खास्त करें। निर्धारित समय में चुनाव करवाने के आदेश दें। मुलाकात के बाद धूमल ने कहा कि देशभर में भाजपा की हवा चल रही है।
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हाल ही में पीएम मोदी के सफल कार्यक्रम की वजह से कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस चाह रहे हैं कि चुनाव टल जाएं। कहा कि सब जानते हैं शिमला नगर निगम के चुनाव निश्चित हैं और आर्टिकल 243 के अंतर्गत 73वें संशोधन के बाद नगर निगम की एक निश्चित सीमा अवधि है। इसके समाप्त होते ही निगम का भंग होना तय है। संविधान और नगर निगम एक्ट की धज्जियां उड़ाते हुए प्रदेश के चुनाव आयुक्त ने गलत निर्णय लिया है।

आयुक्त का दायित्व यह था कि चुनाव समय पर निष्पक्ष तरीके से कराते। उन्होंने सरकार की साजिश में साथ देते हुए मतदाता सूची को फिर से ठीक करने के आदेश दे दिए। यह उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं है। आयुक्त के इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है। भाजपा चाहती है कि संविधान और नगर निगम के कानून के तहत समय अवधि में 5 जून से पहले चुनाव हों।
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कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए धूमल ने कहा कि उन्हें भोरंज चुनाव में झटका लग चुका है। दूसरा नगर निगम चुनावों में लगेगा और तीसरा झटका उन्हें विधानसभा चुनावों में लगेगा। इसी डर से सरकार संविधान की धज्जियां उड़ा रही है। कहा कि राज्यपाल तुरंत हिमाचल चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने के आदेश दें। चुनाव निश्चित समय में करवाए जाएं। राज्यपाल से मुलाकात के दौरान विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक एवं शिमला शहर से विधायक सुरेश भारद्वाज के अलावा कई सभासद और पार्टी नेता भी उपस्थित थे।
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