मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के हमलों के बाद मंगलवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष प्रो प्रेम कुमार धूमल ने पलटवार किया। उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को बेसहाय, निकम्मी और लचर सरकार बताया। वीरभद्र के बयानों से नाराज प्रो धूमल ने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ वीरभद्र सिंह झगड़ालू हो गए हैं। ऐसे में उम्र का तकाजा है कि उन्हें अब इस्तीफा दे देना चाहिए।
आगे उन्होंने कहा कि राज्यपाल के संवैधानिक पद और उनके कार्यों पर टिप्पणी कर सिंह अपनी सामंतवादी विचारधारा को दर्शा रहे हैं। सोमवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राज्यपाल से लेकर भाजपा के शीर्ष नेताओं पर तल्ख टिप्पणी की थी। इसी क्रम में मंगलवार को प्रदेश भाजपा नेताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया।
प्रो धूमल ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा किए जा रहे विकास के दावों को झूठ का पुलिंदा करार देते हुए झूठे दावे करने का आरोप लगाया। कहा कि सिर्फ शब्दों और झूठे वादों से विकास नहीं होता है। अगर कांग्रेस ने तीन सालों में विकास किया होता तो वह विकास धरातल पर दिखता। उन्होंने कहा कि विकास की नीतियां और बेहतरीन प्रशासनिक व्यवस्था के चलते हमेशा पहले तीन स्थानों पर रहने वाला हिमाचल पिछले तीन सालों पर हर स्तर पर पिछड़ चुका है।
70 फीसदी वायदे पूरे नहीं कर पाई सरकार
धूमल यही नहीं रुके और उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार की असफलता की वजह से ही प्रदेश कर्ज के मकड़जाल में पूरी तरह फंस गया है। ऐसे में कांग्रेस सरकार के विकास के दावे करना न केवल बेमानी है बल्कि हास्यास्पद भी है।
धूमल ने कहा कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी कांग्रेस अपने ही घोषणा पत्र के 70 प्रतिशत से अधिक वायदे पूरे नहीं कर पाई है। कांग्रेस नेताओं को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि उनके दावों में इतनी ही सत्यता है तो वह अपने ही घोषणा पत्र के वायदों को पूरा होने का बिन्दुवार श्वेत पत्र जारी करे या फिर जनता से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगे।
वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने भी मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लिया। कहा कि किसी के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर उनसे पलटते हुए मीडिया की गलती बताना और फिर अपने बयानों के लिए माफी मांगना मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुका है। प्रदेश में विपक्षी विधायकों, सांसदों, नेता प्रतिपक्ष, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश और अब राज्यपाल सहित कोई ही प्रमुख व्यक्तित्व बचा होगा जिसके खिलाफ मुख्यमंत्री ने गलत बयानी न की हो।
राज्यपाल पर टिप्पणी पर भी उठाए सवाल
राज्यपाल आचार्य देवव्रत पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सिंह की टिप्पणी पर भी भाजपा नेता नाराज दिखे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह राज्यपाल पद की संवैधानिक महत्व को समझते हुए सार्वजनिक रूप से टिप्णियां बन्द करें। संविधान प्रदत् राज्यपाल के अधिकारों पर गैरवाजिब बयानों व राज्यपाल पद की गरिमा पर प्रहार करने की जो कोशिश कर रहे हैं वह लोकतान्त्रिक परम्पराओं के खिलाफ है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि खेल विधायक पर कोई भी टिप्पणी करने से पहले मुख्यमंत्री को गुजरात में लोकायुक्त बिल पर वहां के राज्यपाल द्वारा प्रस्तुत उदाहरण को भी ध्यान में रख लेना चाहिए। उस समय की तत्कालीन मोदी सरकार द्वारा पारित लोकायुक्त बिल को वहां के राज्यपाल ने नौ वर्षों तक अपने पास ध्यानार्थ रखा था और उस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राज्यपाल के उस कदम को संविधान के तहत मिले अधिकार बताकर टिप्पणी न करने की सीख दे रहे थे।