सत्ता परिवर्तन होने के बाद कांग्रेस सरकार ने साल 2013-14 में पांच हजार विद्यार्थियों के लिए यह योजना शुरू की। इसमें ढाई हजार दसवीं और ढाई हजार बारहवीं के मेधावी विद्यार्थी शामिल किए गए।
साल 2014-15 में वीरभद्र सरकार ने मेधावियों की संख्या बढ़ाकर साढ़े सात हजार की। साल 2015-16 में संख्या को बढ़ाकर दस हजार कर दिया गया। साल 2016-17 में भी दस हजार मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए गए।
अब जयराम सरकार की बेरुखी के चलते प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं एवं बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं की मेरिट में आने वाले दस हजार विद्यार्थियों को इस बार लैपटॉप दिए जाने की संभावना शून्य हो गई है।
प्रदेश में नई सरकार बनते ही जनवरी महीने में शिक्षा विभाग ने सत्र 2016-17 के मेधावियों को दिए जा रहे लैपटॉप के वितरण पर रोक भी लगा दी थी।
लैपटॉप के ऑन होते ही उसमें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की फोटो आ रही थी। इस फोटो को हटाकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की फोटो लगाने के बाद ही विभाग ने वितरण किया था।
जयराम सरकार स्कूलों के बजाये कॉलेजों के मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने पर अधिक फोकस कर रही है। हालांकि कॉलेजों में कितने विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए जाएंगे, यह भी जयराम सरकार अभी तक तय नहीं कर पाई है।
भाजपा ने अपने चुनावी दृष्टिपत्र में फर्स्ट डिविजन में पास होने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स को लैपटॉप देने की घोषणा की है। शिक्षा निदेशालय के मुताबिक कॉलेजों में फर्स्ट डिविजन में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या करीब 33 हजार होती है।
ऐसे में लैपटॉप खरीद के लिए करीब 70 करोड़ का बजट चाहिए है। उधर, स्कूलों के दस हजार मेधावियों को लैपटॉप देने के लिए सरकार करीब 18 करोड़ का बजट देती आई है। ऐसे में 70 करोड़ के बजट का इंतजाम करना भी आने वाले दिनों में सरकार के लिए आसान नहीं रहने वाला है।
अभी नहीं लिया है कोई फैसला : भारद्वाज
दसवीं और बारहवीं कक्षा के मेधावियों को लैपटॉप दिए जाने को लेकर अभी तक कोई भी फैसला नहीं हुआ है। योजना को बंद करने या जारी रखने को लेकर आने वाले दिनों में विचार किया जाएगा।- सुरेश भारद्वाज, शिक्षा मंत्री