सरकार कई जिलों के डीसी और एसपी भी बदलेगी। कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, बिलासपुर और सोलन जिले में डीसी और एसपी की तैनाती के लिए जिले में सबसे पहले एसपी बदले जाने हैं।
इन जिलों के साथ शिमला के डीसी का तबादला भी संभव है। शीतकालीन सत्र से पहले सरकार जिलों में प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया पूरी कर देगी।
रोहित को नगर निगम आयुक्त, डॉ. अमरदेव उच्च शिक्षा निदेशक बने
अफसरशाही में बदलाव के क्रम में सरकार ने नगर निगम शिमला आयुक्त पद पर रोहित जम्वाल की नियुक्त कर दी है। जम्वाल विशेष सचिव गृह का कार्यभार संभाले हुए थे। उन्हें निवर्तमान निगम आयुक्त ज्ञानचंद नेगी की जगह नियुक्ति दी गई है।
दुनी चंद राणा को मुख्यमंत्री का विशेष सचिव बनाया गया है। बीएल बिंटा को उच्च शिक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया है। वहीं उच्च शिक्षा सलाहकार पद पर रहे डॉ. अमरदेव अब उच्च शिक्षा निदेशक होंगे।
सरकार बदलने के साथ सरकारी अमले में व्यापक फेरबदल की परंपरा को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आगे बढ़ाया है। जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री बनने से पहले प्रशासनिक फेरबदल को भी बदले की भावना से जोड़कर देखा जाता रहा है।
जयराम भले बदले की भावना से काम नहीं करने का दावा जता चुके हैं, लेकिन पसंद के अफसरों से सरकार चलाने की रीति नीति के अब वे भी हिस्सा हैं।
ऐसा अमूमन हर राज्य सरकार बदलने पर होता है, लेकिन वीरभद्र सरकार में जिस तरह से रिटायर्ड नौकरशाहों को तरजीह मिली उसी प्रशासनिक चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए कई पदों पर बदलाव मुख्यमंत्री जयराम की मजबूरी भी दिखा।
दूसरी तरफ, प्रदेश की नौकरशाही भी अघोषित तौर पर खुद को सरकारों के हिसाब से बंटी हुई दिखती है।
राजनीतिक नियुक्तियां हर मुख्यमंत्री के बदलने के हिसाब से होती हैं, लेकिन शासकीय पदों पर बैठे अफसरों की जिम्मेदारियों में बदलाव व्यक्तिगत पसंद नापसंद से ज्यादा कामकाज से होता है।
हिमाचल में व्यक्तिगत पसंद नापसंद पिछले कुछ दशकों से हावी हो गई है। कांग्रेस सरकार पर कुछ क्षेत्र विशेष के अफसरों तरजीह देने के आरोप लगता रहा है, जबकि भाजपा सरकारों ने भी इसका अनुसरण किया है।
वीरभद्र और धूमल सरकार में ऐसा होता रहा। दो दशकों बाद प्रदेश को नया मुख्यमंत्री चेहरा बतौर जयराम ठाकुर मिला, लेकिन परंपरा जारी है। मुख्यमंत्री ने पहली कैबिनेट में रिटायर लोगों को बाहर करने का कड़ा फैसला लिया।
इसका असर उनके कार्यालय में रिटायर्ड आईएएस टीजी नेगी की जगह प्रधान सचिव मनीषा नंदा और रिटायर्ड सुभाष अहलुवालिया की जगह प्रधान निजी सचिव विनय सिंह को बनाना पड़ा।
उनका अगला बड़ा फैसला शपथ ग्रहण के पांच दिन बाद मुख्य सचिव वीसी फारका को हटाने का रहा। फारका को वीरभद्र सरकार का करीबी बताया जाता है। जबकि नए मुख्य सचिव विनीत चौधरी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के करीबी माने जाते हैं।
हालांकि इससे पहले वे अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर से कार्मिक और तरुण कपूर से आबकारी हटा चुके हैं। अब देखना यह है कि पूर्ववर्ती सरकारों की इतर जयराम सरकार किस स्तर का और प्रशासनिक फेरबदल करती है।