भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें अनुराग ठाकुर को आपराधिक मामले में बरी करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति एके गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने गत वर्ष 30 मई को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है।
उससे पहले राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ के समक्ष कहा कि अनुराग ठाकुर समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा निरस्त करने का हाईकोर्ट का फैसला दोषपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ठाकुर और उनके साथ करीब 250 लोगों ने वर्ष 2013 में धर्मशाला में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर में जबरन घुसकर सरकारी कामकाज को बाधित किया था।
इससे पहले हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ट्रायल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अनुराग ठाकुर और अन्य आरोपियों को समन किया था। किसी सरकारी नौकर या वरिष्ठ अधिकारी ने इस संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं की थी। हाईकोर्ट ने अनुराग ठाकुर और अन्य द्वारा ट्रायल कोर्ट के समन किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया था।