हिमाचल प्रदेश की सड़कों, रेलवे लाइन, राजधानी के जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डा और पानी की योजनाओं जैसे प्रोजेक्टों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग की भूमि के इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। बिना मंजूरी प्रदेश के ऐसे 433 प्रोजेक्ट लंबे समय से अधर में थे। अब जल्द ही इन प्रोजेक्टों का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी के बाद जिला शिमला की तहसील रामपुर में एनडीआरएफ बटालियन के आधारभूत ढांचे के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है। चंबा जोत से 150 किलोमीटर के दायरे में होने वाले मौसम के बदलाव की जानकारी देने वाला रडार भी लगेगा।
काफी दिनों से मौसम विज्ञान विभाग इसके लिए मंजूरी के इंतजार में था। 9 और 14 दिसंबर 2021 में दायर याचिका (सिविल) संख्या 202, 1995 को पारित आदेश में छूट देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वन संरक्षण अधिनियम 1980 (एफसीए), अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 (एफआरए) के तहत 433 मामलों में वन भूमि को गैर वन उद्देश्य के लिए परिवर्तित करने की अनुमति दी है।
एफसीए में 103 परियोजनाएं मंजूर
63 सड़कें, 13 विद्युत परियोजनाएं, एक हवाई अड्डा, तीन अनाज और सब्जी मंडियां, चार कॉलेज भवन, एक अस्पताल, चार बस स्टैंड, एक मार्केट यार्ड, दो रेलवे लाइन, ईवीएम के भंडारण के लिए एक गोदाम, मौसम रडार, एक रोपवे, एक हेलीपैड, दो खनन प्रोजेक्ट, एक पार्किंग, दो हॉट मिक्स प्लांट, एक पुलिस चौकी और एक एनडीआरएफ आधारभूत ढांचा।
एफआरए के तहत 330 प्रोजेक्ट स्वीकृत
13 सामुदायिक केंद्र, 268 सड़क परियोजनाएं, 11 स्कूल भवन, 19 पेयजल आपूर्ति योजनाएं और पानी की पाइपलाइन, 5 लघु सिंचाई नहर या वर्षा जल संचयन संरचनाएं, 10 स्वास्थ्य संस्थान, तीन कौशल उन्नयन और व्यावसायिक परियोजना प्रशिक्षण केंद्र भवन, एक उचित मूल्य की दुकान।