हिमाचल में लगभग 4000 और पीटीए शिक्षक अनुबंध पर आएंगे। सोमवार को सरकार ने इसका रास्ता साफ कर दिया। सरकार ने गैप पीरियड वाले शिक्षकों को भी बड़ी राहत देते हुए उनके अवकाश को विभिन्न कारणों से कंसीडर करने का फैसला ले लिया है।
अभी तक करीब 2000 शिक्षक ही अनुबंध पर आ पाए थे। ये पीजीटी, टीजीटी, डीपीई और सीएंडवी हैं। अब लगभग 6810 पीटीए शिक्षकों में से करीब 800 से अधिक शिक्षक ही अनुबंध पर लाने शेष रह जाएंगे।
नियमित होने से बचे 10 साल पूरा कर चुके लगभग 57 पैरा शिक्षकों का रेगुलर होने का रास्ता भी साफ हो गया है। इन पर भी अवकाश के यही नियम लागू होंगे।
सरकार ने स्पष्ट की स्थिति
अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा के नए निर्देश सोमवार को निदेशक उच्चतर शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षा के कार्यालयों में पहुंच गए। इसके मुताबिक गैर हाजिरी का पीरियड जिसमें कि एक्सट्रा ऑर्डिनरी लीव शामिल है, उस पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है।
आरएंडपी रूल्स को पूरा करने के लिए अगर इस बीच बीएड या दूसरी शिक्षा के लिए कोई अवकाश लिया गया है तो वह मान्य होगा। 84 या 168 दिनों से अधिक की मैटरनिटी लीव को भी कंसीडर किया जाएगा। इसे दो अलग-अलग स्पैल में माना जाएगा।
इसके अलावा मेडिकल ग्राउंड पर लिए गए अवकाश को भी अनुबंध पर लेने के लिए मान्य किया गया है।
पैरा के लिए 60, पीटीए के लिए 42 दिन अलग से
शिक्षा अवकाश, मैटरनिटी अवकाश और मेडिकल अवकाश के अलावा पैरा शिक्षकों के लिए अन्य कारणों से छुट्टी होने पर 60 दिन और पीटीए शिक्षकों को 42 दिन दिए गए हैं। अगर बीच में अन्य कारणों से इतने दिनों का गैप आ गया है तो इसे ब्रेक-इन सर्विस नहीं माना जाएगा।
मनोविज्ञान, इलेक्ट्रानिक्स और होम साइंस विषयों के पैरा लेक्चरर को इनके डाइंग काडर होने के कारण अब टीजीटी का ऑफर दिया जाएगा। उन्हें यह ऑफर टीजीटी के उन पदों के लिए दिया जाएगा, जिनके लिए वे पात्र हैं। जिन पीटीए शिक्षक आंदोलनकारियों ने सालों से यह लड़ाई लड़ी, वे अनुबंध पर आने से फिर वंचित रह जाएंगे। इनमें पीटीए शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष विवेक मेहता भी शामिल हैं।
विवेक मेहता ने ब्रेक-इन-सर्विस पर स्थिति स्पष्ट कर 4000 और शिक्षकों को अनुबंध पर लाने का मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान का आभार जताया है। मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बाकी बचे शिक्षकों को अनुबंध पर लेने के लिए दोबारा से कै बिनेट बुलाने का आश्वासन दिया है। इसमें जरूर कोई समाधान निकलेगा। मेहता ने कहा कि कुछ शिक्षक नेता पीटीए पर राजनीति कर रहे हैं, वे इससे बाज आएं।
जिन्होंने लड़ाई लड़ी, वे वंचित
उधर, हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि पीटीए शिक्षक संघ की राज्य कार्यकारिणी अपना पक्ष और मांग मुद्दों के साथ नहीं रख पाई। जो संघर्ष लड़ रहे हैं, वे फायदा नहीं उठा सके हैं।
संघ की राज्य कार्यकारिणी के सभी लोग राज्य कार्यकारिणी में आने से वंचित रह गए। इन्कवायरी से निकालने के बाद जिनकी नियुक्ति हाई कोर्ट ने वैध ठहराई है, वे भी सात साल की गिनती में आने चाहिए।
हाईकोर्ट ने पीरियड बेस भर्ती पर लगाई रोक
वहीं, मंडी जिले के सरकारी स्कूलों में आयोजित की जा रही पीरियड बेस अध्यापक भर्ती पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशिक्षित पात्र बेरोजगारों ने राहत महसूस की है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तुरंत हरकत में आकर प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल मुखियाओं को पीरियड बेस अध्यापक भर्ती पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। जिले के कई सरकारी स्कूलों में खाली चल रहे शिक्षकों के पदों पर शिक्षा विभाग ने पीरियड बेस अध्यापक भर्ती करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन किसी ने इस संबंध में हाईकोर्ट में रिट कर आपत्ति दर्ज करवाई है।
जिस पर हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक तुरंत प्रभाव से भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई है।
साक्षात्कार का रिजल्ट भी रोका
साथ ही उपनिदेशक ने किसी भी सरकारी स्कूल में हाईकोर्ट के आगामी आदेशों तक भर्ती न करने और वर्तमान में आयोजित की जा रही भर्ती को भी रोकने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा जिन सरकारी स्कूलों में भर्ती प्रक्रिया के तहत साक्षात्कार ले लिए गए हैं।
उन्हें परिणाम न घोषित करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि जिले के करीब 20 स्कूलों में वर्तमान पीरियड बेस अध्यापक की भर्ती के लिए साक्षात्कार आयोजित कर लिए गए हैं। जबकि कई दर्जन स्कूलों में खाली चल रहे पदों पर साक्षात्कार प्रक्रिया अपनाई जा रही है, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश पर भर्ती में रोक लगा दी गई है।
इधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक आरके विद्यार्थी ने हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि जिले के सरकारी स्कूलों में पीरियड बेस अध्यापक भर्ती पर रोक लगा दी गई है।