24 अक्तूबर, 2003 को परिवहन निगम के निदेशक मंडल की बैठक में कंडक्टरों के 300 पद भरने को मंजूरी दी गई। इनमें सामान्य वर्ग के 166, ओबीसी के 54, एससी के 66 और एसटी के 14 पद भरने थे।
इसके लिए 17 हजार 890 आवेदन आए। 20 सितंबर, 2004 को 300 की जगह 365 पद भरे गए। 12 मई, 2005 को 13 और पद भर दिए। यही नहीं, अकेले धर्मशाला डिवीजन से ही करीब 147 कंडक्टर चयनित हुए।
इनमें भी तत्कालीन परिवहन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां से 73 और रोहड़ू से 35 लोग चयन सूची में थे। डिवीजन स्तर पर मेरिट भी नहीं बनी। भर्ती दस्तावेजों में कटिंग और ओवर राइटिंग थी।
इससे भर्ती विवादों में आ गई। कोर्ट के आदेश पर शिमला पुलिस ने 14 मार्च, 2017 को तत्कालीन एमडी, डीएम समेत पांच लोगों को आरोपी बनाकर सदर थाने में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद एसआईटी का गठन हुआ।
मामले की चार्जशीट तैयार की जा रही है। अदालत से इंटरव्यू कमेटी के चेयरमैन को हिरासत में लेने का आग्रह किया जा रहा है। एसआईटी हर पहलू पर तफ्तीश कर रही है। - दिनेश शर्मा, डीएसपी सिटी शिमला