शिमला के भट्टाकुफर स्थित फल मंडी में सेब की बोली लगाते आढ़ती ।
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भट्टाकुफर फल मंडी में टाइडमैन सेब की आवक बढ़ गई है। शुक्रवार को मंडी में करसोग और ठियोग क्षेत्र से करीब 90 से 100 पेटी सेब की सप्लाई पहुंचीं। सभी पेटियां मंडी में यूनिवर्सल कार्टन में ही आईं। पीआरजे ट्रेडर्स 53 नंबर फार्म पर शुक्रवार को 50 पेटी सेब करसोग और करीब 10 पेटी सेब ठियोग क्षेत्र से यूनिवर्सल कार्टन में बिकने के लिए आई। इस दौरान 20 किलो की एक पेटी को 1,100 से 1,500 रुपये तक दाम मिले। फार्म के संचालक अंशुमन ने बताया कि सेब सीजन ने रफ्तार पकड़ना शुरू कर दी है। हालांकि सेब अभी गुणवत्ता के अनुसार सही नहीं आ रहा है। सेब का आकर छोटा और रंग फीका होने की वजह से इसे बेहतर दाम नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में बागवानों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
इसके अलावा मंडी में अर्ली वैरायटी रेड जून सेब की खेप भी पहुंच रही है, लेकिन माल कच्चा होने के कारण इसे भी बेहतर दाम नहीं मिले। नाशपाती के सीजन ने रफ्तार पकड़ ली है। आढ़ती यशवंत ने बताया कि मंडी में रोजाना करीब दो से तीन हजार पेटी नाशपती पहुंच रही है। शुक्रवार को ए ग्रेड मोटी डंडी नाशपाती की 20 किलो की पेटी 1,500 से 2,300, बी ग्रेड 500 से 1,000 और सी ग्रेड नाशपती 300 से 400 रुपये प्रति पेटी के हिसाब से बिकी। सबसे ज्यादा नाशपती की फसल कोटखाई और कुमारसेन के इलाके से पहुंच रही हैं। वहीं आढतियों के अनुसार इसकी गुणवत्ता भी बेहतर है।
दाम सही न मिलने से बागवान परेशान
सीजन की शुरूआत में सेब के अच्छे दाम न मिलने से बागवान परेशान हैं। सूखे की मार के चलते सेब का रंग और आकार नहीं बन पाया है। जिसके चलते फल मंडी में इसे अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। भट्ठाकुफर फल मंडी में फसल बेचने आए बागवान बलदेव शर्मा ने बताया कि शुरूआत में हर वर्ष फसल को अच्छे दाम मिलते थे, लेकिन इस बार सूखे की मार के चलते बागवानों को फसल के बेहतर दाम नहीं मिल रहे हैं, उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छे दाम मिलेंगे।