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जब वो मंजर देख अटल की आंखों में आ गए थे आंसू

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी को अपने दूसरे घर प्रीणी (मनाली) से इतना प्यार रहा है कि वे यहां के लोगों की खुशी में खुश और उनके दुख में आंसू तक बहाते रहे हैं।
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1995 में कुल्लू-मनाली में कुदरती कहर बरपा। चारों ओर तबाही मच गई। घर, खेत-खलिहान सब उजड़ गए। मंजर देखकर अटल की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने प्रभावित गांवों का पैदल दौरा किया और उनका दुख दर्द साझा किया।

प्रीणी स्कूल में हिंदी टीचर रहे अनिल शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री रहते हुए वाजपेयी जब प्रीणी स्कूल के बच्चों से मिलने पहुंचे तो बच्चों ने जिद्द की कि वे उन्हें मामा कहेंगे। उन्होंने इसे सहजता से मान लिया।
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मनाली में उन्हें आज भी मामा पुकारते हैं। प्रीणी गांव के पूर्व प्रधान देवी राम ठाकुर, पूर्व उपप्रधान लोत राम ठाकुर का कहना है कि वे हमारे गांव के मुखिया थे। उन्हें आज भी हम मुखिया मानते हैं। वे जब भी आते थे तो गांव की हर छोटी-बड़ी समस्या का निदान करते थे।
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मनाली में आज भी अटल को पुकारते हैं मामा

मनाली में उन्हें आज भी मामा पुकारते हैं। प्रीणी गांव के पूर्व प्रधान देवी राम ठाकुर, पूर्व उपप्रधान लोत राम ठाकुर का कहना है कि वे हमारे गांव के मुखिया थे। उन्हें आज भी हम मुखिया मानते हैं। वे जब भी आते थे तो गांव की हर छोटी-बड़ी समस्या का निदान करते थे।

गांव की महिलाओं मणी देवी, खिमी देवी, आमरा देवी और पंचायत प्रधान ठाकुर दास ने कहा कि भारत रत्न की शुभकामनाओं के साथ हम उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

उन्होंने बताया कि भारत रत्न की खुशी ग्रामीणों ने लड्डू बांटकर मनाई। हमें गर्व है कि आज प्रीणी को अटल के नाम से जाना जाता है।
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किराये पर भी रहे थे यहां

पीएम बनने से पहले अटल विहारी वाजपेयी यहां एक आम आदमी की तरह रहते थे। वे जगतसुख में विद्या प्रकाश भारद्वाज के घर पर किराये पर रहते थे। यहां से हर गांव खासकर खेतों में घूमा करते थे।

यहां कई कविताएं भी उन्होंने लिखीं। इसके बाद उन्होंने प्रीणी में अपना आशियाना सजाया। पतलीकूहल की ट्राउट के तो वे दीवाने थे।

स्कूल को भेंट किया था कविता संग्रह
प्रीणी स्कूल में अटल न केवल बच्चों को अपनी कविताएं सुनाया करते थे, बल्कि उन्होंने अपना एक कविता संग्रह भी उन्हें भेंट किया था। प्रीणी हाई स्कूल में ये किताब आज भी सुरक्षित रखी हुई है।
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