ये योग्यता जरूरी
किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर, आचार्य में कम से कम 50 फीसदी अंकों के साथ शास्त्री या संस्कृत के एक अनिवार्य विषय के साथ स्नातक, संस्कृत में स्नातकोत्तर, आचार्य और बीएड होनी चाहिए। कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ सीनियर सेकेंडरी और संस्कृत के एक अनिवार्य विषय के साथ प्रारंभिक शिक्षा में चार साल का बैचलर ऑफ एलीमेंट्री एजुकेशन (बीएलएड) करने वाले भी पात्र होंगे। वहीं, एनसीटीई से मान्यता प्राप्त किसी संस्थान से संस्कृत में एक अनिवार्य विषय सहित चार वर्षीय कला शिक्षा स्नातक या विज्ञान शिक्षा स्नातक भी भर्ती के लिए पात्र होंगे। स्कूल शिक्षा बोर्ड से टेट पास अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल किया जाएगा। स्नातक में अंकों का न्यूनतम प्रतिशत उन पर लागू नहीं होगा, जिन्होंने 29 जुलाई 2011 से पहले ही बीएड या प्रारंभिक शिक्षा स्नातक में प्रवेश लिया था।
एसएमसी शिक्षकों के लिए एलडीआर कोटा तय
सरकार ने एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने के लिए टीजीटी के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में बदलाव कर दिया है। इसके तहत स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से रखे गए इन शिक्षकों को लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट (एलडीआर) कोटा दिया जाएगा। प्रदेश के स्कूलों में वर्तमान में 2,408 शिक्षक एसएमसी आधार पर कार्यरत हैं, जिन्हें एक पात्रता के आधार पर नियमित होने का मौका एलडीआर कोटा तय होने से मिलेगा। नए नियमों के अनुसार टीजीटी के भर्ती कोटा में बदलाव किया है।
37.5 फीसदी कोटा सीधी भर्ती का
इसमें 37.5 फीसदी कोटा सीधी भर्ती का राज्य चयन आयोग के माध्यम से होगा। इसी तरह 32.5 फीसदी कोटा बैचवाइज के लिए और 0.5 फीसदी कोटा एलडीआर का होगा जो एसएमसी शिक्षकों को दिया जाएगा। पदोन्नति के लिए 25 फीसदी कोटे में कोई बदलाव नहीं किया है। टीजीटी के नए नियमों में अब स्नातकोत्तर डिग्री के अंक भी पात्रता दिला सकते हैं। यदि किसी अभ्यर्थी को स्नातक में पूरे अंक नहीं हैं, तो वह स्नातकोत्तर के आधार पर आवेदन कर सकता है। शिक्षा सचिव राकेश कंवर की ओर से यह अधिसूचना जारी की गई है।