हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ब्यास का पानी घरों और सड़कों के लिए खतरा न बने, इसके लिए नदी के रुख को मोड़ने का काम शुरू हो गया है। आईआईटी रूड़की और मंडी की तकनीकी टीम की ओर से किए सर्वे के बाद जिले में करीब 44 जगहों को चिन्हित किया गया है। प्रशासन ने इसकी शुरूआत कुल्लू में ब्यास नदी के पतलीकूहल, शिरढ़, जिया, देव धाम और पार्वती घाटी के कसोल के चोजनाला से की है। नदियों को रुख मोड़ने के बाद इसमें एकत्रित होने वाले पत्थर और रेत को बाद में नीलामी कर सरकार को लाखों रुपये का राजस्व आएगा।
ब्यास के अलावा जिले के बंजार की तीर्थन नदी, मणिकर्ण की पार्वती नदी और जिला मुख्यालय के साथ बहने वाली सरवरी खड्ड शामिल है। बरसात में आई आपदा के समय तीनों नदियों और सरवरी खड्ड ने भारी तबाही मचाई। कई जगहों पर नदियों का रुख मुड़ गया। जो भविष्य में लोगों के घरों, बाजारों और हाईवे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आपदा के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आई और कुल्लू की ऐसी जगहों को चिन्हित करने के लिए सर्वेक्षण किया गया। सितंबर में आईआईटी रूड़की, आईआईटी मंडी, भूवैज्ञानिक और जलशक्ति विभाग, प्रशासन की संयुक्त टीम ने सर्वे कर इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।
सरकार ने हरी झंडी देते हुए उपरोक्त तीन नदियों और एक खड्ड के उन जगहों से पानी के बहाव को बदलकर उसे पुराने स्वरूप में लाने की कवायद प्रशासन ने शुरू कर दी है। ब्यास नदी में मनाली के पलचान से लेकर औट सबसे अधिक काम होगा। जहां नदी को जगह-जगह रुख मोड़ टापू बने हैं। इसके लिए एक सब कमेटी बनाई गई है। इस दौरान अगर कोई काम को रोकने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन एक्ट में मामला दर्ज किया होगा।
लोक निर्माण विभाग की देखरेख में होगा काम
पांच जगहों में पहले चरण में ब्यास नदी के रुख मोड़ने का काम शुरू हो गया है। इसकी निगरानी संबंधित लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता की ओर से की जाएगी। बीच-बीच में एसडीएम इसका निरीक्षण करते रहेंगे।
पहले चरण में ब्यास नदी में चार जगह और पार्वती के कसोल के पास चोजनाला में एक जगह पर बने टापुओं से मलबा, पत्थरों को हटवाकर नदी को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा। इसका काम शुरू कर दिया है। इसमें निकलने वाले रेत और पत्थरों को बाद में सरकार के आदेश पर नीलाम किया जाएगा।
-विकास शुक्ला, एसडीम, कुल्लू