हिमाचल में इस बार लोग जिला परिषद और बीडीसी की अपेक्षा पंचायत प्रधान का चुनाव लड़ने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 14वें वित्तायोग के तहत विकास कार्यों की राशि सीधे पंचायत को जाएगी। इसके चलते लोग जनता में पैठ बनाने और विकास कार्य करने के लिए प्रधान बनने को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।
प्रदेश में पहले जिला परिषद को कुल बजट का 50 फीसदी, जबकि पंचायत समिति सदस्यों को 30 फीसदी बजट जारी होता था। सबसे कम राशि पंचायतों को 20 फीसदी जारी होती थी। अब केंद्र सरकार ने विकास कार्यों का सीधा पैसा पंचायतों को देने का फैसला लिया है। यही नहीं, अगर प्रदेश सरकार इस राशि को जारी करने में देरी करती है जो सरकार को कुल राशि का ब्याज तक भरने का प्रावधान किया गया है।
बजट में कटौती करने पर जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों ने इस फैसले का विरोध भी किया था। बाकायदा इसको लेकर कई बार जिला परिषद और बीडीसी सदस्य पंचायतीराज मंत्री से भी मिले थे, लेकिन इसमें प्रदेश सरकार का तर्क था कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के तहत यह सब हुआ है।
पंचायतीराज विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रदेश सरकार को 97 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया है। वह राशि भी सीधे पंचायतों को जारी की गई है। यह राशि 14 वें वित्तायोग के तहत दी गई है।
हर साल आठ लाख मिलेंगे पंचायतों को- हर पंचायत को प्रति साल 8 लाख रुपये विकास कार्यों के लिए मिलेंगे। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार यह राशि किस तरह से खर्च की जानी है इसका फैसला भी ग्राम सभा करेगी।
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार बजट सीधा पंचायत को जाएगा। पहले जिला परिषद सदस्यों को 50 फीसदी जबकि बीडीसी को 30 और पंचायत को 20 फीसदी राशि जारी होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। -अनिल शर्मा, पंचायतीराज मंत्री