राकेश सिंघा का सोशल मीडिया पर बयान भी खूब वायरल हो रहा है। कई अन्य लोगों ने भी सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। सिंघा ने कहा है कि संविधान के विरुद्ध बातें हो रही हैं। पूरा जनजातीय क्षेत्र छोड़ दिया गया है।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ओंकार शर्मा का फिर विभाग बदले जाने के मामले में सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा हो गया है। अब माकपा विधायक राकेश सिंघा भी इस संदर्भ में भड़क उठे हैं। सिंघा ने आईएएस अधिकारी ओंकार शर्मा के तबादले पर कड़ा एतराज जताया है। माना जा रहा है कि ओंकार शर्मा ने जनजातीय क्षेत्रों में नियुक्ति पर ड्यूटी के लिए न जाने वाले आयुर्वेद डाक्टरों को डिमोट करने का निर्णय लिया तो इससे वे नाराज हो गए। इस मामले ने तूल पकड़ा तो सरकार ने उनसे महकमा ही वापस ले लिया। राकेश सिंघा का सोशल मीडिया पर बयान भी खूब वायरल हो रहा है। कई अन्य लोगों ने भी सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
विज्ञापन
सिंघा ने कहा है कि संविधान के विरुद्ध बातें हो रही हैं। पूरा जनजातीय क्षेत्र छोड़ दिया गया है। दुर्गम क्षेत्र में नियुक्तियां की जा रही हैं और तनख्वाह शिमला से निकाली जा रही है। सरकारें मनमर्जी से नहीं, बल्कि नियमों के आधार पर चलती हैं। गैर सांविधानिक कार्य किए जा रहे हैं। इस मामले में प्रदेश के अधिकारियों को स्टैंड लेना चाहिए। ऐसे मामलों का समाधान क्या है, ये तो सरकार और मुख्यमंत्री को सोचना है। उल्लेखनीय है कि ओंकार शर्मा से आयुर्वेद विभाग वापस लेकर उन्हें तकनीकी शिक्षा महकमा दिया गया है। इससे पहले उनसे राजस्व और बागवानी जैसे महकमे भी वापस लिए जा चुके हैं। ओंकार शर्मा को निडर अधिकारी माना जाता है। कोविड काल में भी ओंकार शर्मा ने कई अहम फैसले लिए थे।