समाजसेवा का जुनून देखना है तो बिलासपुर के रितिक में देखिये। जरूरतमंदों की सेवा, खूनदान करना यही रितिक और उसके दोस्तों का शौक है। स्वयं 35 बार रक्तदान कर चुके रितिक पूरे देश में रक्त उपलब्धता का कार्य अपने मित्रों की सहायता से कर रहे हैं। बिलासपुर के गांव मंझोटी के रितिक शर्मा को इन्हीं कार्यों के चलते कोलकाता में मानव रत्न सम्मान 2018 से नवाजा गया।
उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में यह पुरस्कार रक्तदान एवं समाजसेवा के क्षेत्र में किए उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया जा रहा है। वहीं पुरस्कार मिलने से उनके गांव मंझोटी में खुशी की लहर है।
हाल ही में हरियाणा के अंबाला में एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें रक्तवीर की उपाधि से भी नवाजा गया था। रितिक रक्त सेवा के साथ गरीब लोगों की सहायता, गरीब कन्याओं की शादी इत्यादि जैसे समाजसेवा के कार्यों में भी आगे रहते हैं।
प्रदेश के लोगों की पीजीआई में सेवा को ये अपना रुटीन वर्क मानते हैं। मरीजों के साथ आए तीमारदारों के रुकने के प्रबंध से लेकर उनके भोजन की व्यवस्था इनकी सेवा के कार्यों में शामिल है।
सर्दियों में यही मित्र सड़क पर रहने वाले गरीबों को कंबल बांटते भी दिखाई देते हैं। कुछ दिन पहले ही इन मित्रों के ग्रुप से ही सागर पंडित और अमित स्वामी ने आगरा में सबसे कम पाए जाने वाले रक्त बॉम्बे ब्लड ग्रुप की कमी को भी पूरा किया था। इस ब्लड ग्रुप के लोगों की संख्या केवल सैकड़ों में ही है।
बस एक खबर ने बदल दी रितिक की सोच- रितिक शर्मा (22) का कहना है कि वह पंजाब विश्वविद्यालय से बीएचएमएस कर रहे हैं। समाजसेवा के लिए उन्होंने किसी से प्रेरणा नहीं ली।
तीन साल पहले जब वह अपने दोस्तों के साथ कहीं बैठे थे तो उन्होंने एक पेपर में खबर पढ़ी कि खून न मिलने से 16 साल के युवक की मौत हो गई। उसके बाद उन्होंने ठान लिया कि अब खून की कमी से किसी की मौत न हो। इसके बाद उन्होंने एक ग्रुप बनाया और इसमें वालंटियर जोड़ते गए।
हिमालय सेवियर नाम से चल रहा प्रदेश में ग्रुप- रितिक शर्मा का कहना है कि भारत के अलावा विदेशों में भी उनका ग्रुप कार्य कर रहा है। कनाडा व दुबई में उनकी अलग-अलग टीमें कार्य कर रही हैं, जो आपातकाल में गंभीर मरीजों को ब्लड मुहैया करवा रही है। देश के सभी राज्यों में उन्होंने कोआर्डिनेटर बनाए हैं, जो व्हाट्स ऐप के माध्यम से सीधे एक दूसरे से जुड़े हैं।
इस समय पूरे देश में करीब 100 से ज्यादा व्हाट्स ग्रुप चल रहे हैं। इसके माध्यम से 15 मिनट से लेकर एक घंटे तक ब्लड डोनर मरीज के तीमारदारों के पास पहुंच जाते हैं। जबकि हिमाचल में हिमालय सेवियर के नाम से ग्रुप कार्य कर रहा है। ऊना से हिमांशु विश्वामित्र और कांगड़ा से हरीश कुमार पूरा हिमाचल देख रहे हैं।