नाटी किंग ठाकुर दास राठी के गीत ‘...ओ बांकी चंद्रा याद रखी गला मेरी ओ’ में... बांकी चंद्रा का किरदार निभाने वाली कुल्लू जिले के गांव शांघड़ के मध्यवर्गीय परिवार में जन्मीं रजनी (21) किसी परिचय की मोहताज नहीं थीं।
बांकी चंद्रा के नाम से मशहूर रजनी आज हमारे बीच नहीं हैं। कुछ दिन पहले सड़क हादसे में उनका देहांत हो गया, लेकिन वह संगीत जगत में कभी न भूलने वाली यादें छोड़ गई हैं।
रजनी को बचपन से एक्टिंग का शौक था। वह कुल्लू के रूआडूू गांव में अपनी बुआ के पास ही रहती थीं। जब रजनी जमा एक कक्षा में पढ़ती थीं, तब उन्होंने एक साल तक किंग ऑफ नाटी ठाकुर दास राठी के पास संगीत की शिक्षा ली। इसके बाद भी डांस सीखने का सिलसिला जारी रखा।
वह ठाकुर दास राठी के साथ होने वाले कार्यक्रम में कोआर्टिस्ट के तौर पर जाती थीं। राठी के साथ उन्होंने बतौर कोआर्टिस्ट कई शो किए, जिनमें उनका रोल डासिंग का रहता था। हालांकि, उनके माता-पिता चाहते थे कि वह अध्यापक बनकर नौकरी करें।
अपने माता-पिता की इच्छा पूरा करने के लिए वह गड़सा में जेबीटी कर रही थीं। यहां वह प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रही थीं। रजनी ने ठाकुर दास राठी के गीत ‘...हवा लागी चंडीगढ़ा री’ में बतौर को-आर्टिस्ट काम किया था। इसके बाद ‘...ओ बांकी चंद्रा’ गीत में ठाकुर दास राठी के साथ नायिका का रोल निभाया।
इस गीत को दर्शकों ने इतना पंसद किया कि गीत को अब तक 33 लाख व्यूज मिल चुके हैं। रजनी के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। गाने की लोकप्रियता के चलते सहपाठी, गांव के लोग भी बांकी चंद्रा के नाम से ही पुकारते थे।
लोकगायक ठाकुर दास राठी ने कहा कि पहले ही गीत को 33 लाख व्यूज मिलने के बावजूद रजनी में सादगी थी। उसे कभी नहीं लगता था कि वह इतनी बड़ी अदाकारा हैं। रजनी में एक्टिंग, डासिंग को लेकर एक जूनून था।