बैंटनी कैसल शहर का एक ऐतिहासिक एवं धरोहर भवन है। उन्होंने कहा कि सरकार जिला स्तरीय ग्राम शिल्प मेलों के अतिरिक्त अंतर-राज्य ग्राम शिल्प मेलों को प्रदेश के अन्य भागों में भी करवाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की लोक गाथाओं, ऐतिहासिक घटनाओं और सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना ‘आज पुरानी राहों से’ करने की घोषणा की है।
प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश के वाद्य यंत्रों, चंबा रुमाल, कांगड़ा पेंटिंग को लघु आकृति के सांस्कृतिक प्रतीकों के रूप में तैयार करने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने भाषा कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से तैयार की गई वास्तुकारों की निर्देशिका एवं ब्रोशर का भी विमोचन किया।
इस अवसर पर भाषा कला एवं संस्कृति विभाग की निदेशक रूपाली ठाकुर, खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, नगर निगम महापौर कुसुम सदरेट, उपमहापौर राकेश शर्मा, डीसी अमित कश्यप
, निदेशक सूचना एवं जन संपर्क अनुपम कश्यप, आर्थिक एवं सांख्यकी विभाग के सलाहकार प्रदीप चौहान, उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रो शोभगया वर्धन मौजूद रहे।