प्राकृतिक खेती के उत्पाद न केवल स्वस्थ जीवन जीने में सहायक होते हैं, बल्कि पर्यावरण मित्र भी हैं। इस खेती के अंतर्गत किसानों को एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा।
बल्कि, उन्हें बंजर भूमि को पुन उपजाऊ बनाने, पानी का न्यूनतम उपयोग करने, स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित उत्पाद तैयार करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए किसानों से भारतीय नस्ल की गाय को पालने का आग्रह किया। कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकांत बाल्दी, प्रधान सचिव कृषि ओंकार शर्मा, पालमपुर के विधायक
आशीष बुटेल, प्राकृतिक खेती के मास्टर प्रशिक्षक डॉ वजीर, कृषि निदेशक डॉ देशराज शर्मा, कुलपति प्रो अशोक सरियाल और राज्यपाल के सलाहकार डॉ शशिकांत शर्मा आदि मौजूद रहे।
प्रदेश में प्राकृतिक खेती का बीड़ा उठाने वाले राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मिशन को कृषि विभाग ने भी प्रदेश में आगे बढ़ाने की शुरूआत कर दी है। पालमपुर की बड़सर और जिया पंचायतें जिले में प्राकृतिक खेती का कार्यान्वयन करने वाली प्रथम पंचायतें होंगी।
पालमपुर के चचियां में शून्य लागत प्राकृतिक खेती के तहत प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना’ प्रशिक्षण शिविर के शुभारंभ में प्राकृतिक खेती की बात हुई। शिविर का शुभारंभ करने पहुंचे राज्यपाल ने कहा कि अब
अधिक जीवित रहना है तो रासानियक प्रभावों वाली खेती को कम करना होगा। अन्यथा दुष्परिणाम जल्द सामने आएंगे। अब शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाना समय की मांग है।