500 मिलीलीटर की प्लास्टिक बोतलों के उपयोग पर है रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश में सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य राज्य संगठनों की बैठकों तथा सम्मेलनों में 500 मिलीलीटर प्लास्टिक की बोतलों (पीईटी) के उपयोग पर लगे प्रतिबंध के बावजूद सरकारी आयोजनों में इन बोतलों का जमकर इस्तेमाल हो रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार विभाग खुद ही नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक जून 2025 से 500 मिलीलीटर तक की प्लास्टिक की बोतलों पर प्रतिबंध लगा रखा है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश जीव अनाशित कूड़ा-कचरा (नियंत्रण) अधिनियम 1995 की धारा 3 (क) और 21 जनवरी 2025 की अधिसूचना में जारी किया है। सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम और अन्य राज्य संगठनों की सभी बैठकों, सम्मेलनों और कार्यक्रमों में 500 मिलीलीटर प्लास्टिक बोतलों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। प्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटलों में भी यह नियम लागू होगा। आदेश में कांच की बोतलें, डिस्पेंसर/कियोस्क और स्टील कंटेनर जैसे टिकाऊ विकल्प अपनाने का निर्देश दिए हैं।
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पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा और शहरी विकास विभागों को पीईटी बोतलों के उपयोग को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण विभाग बोतलों के पुनर्चक्रण और रिसाइक्लिंग प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए जिम्मेदार होंगे। शिमला में होने वाली विभिन्न सरकारी बैठकों और विभागीय कार्यक्रमों में पीईटी बोतलों का उपयोग किया जा रहा है।
मुख्य सचिव के यह थे आदेश
मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आदेश में स्पष्ट किया था कि नियमों का उल्लंघन करने पर पहले से लागू दंड और जुर्माने समान रूप से लागू रहेंगे। अधिसूचना के अनुसार नियम का उल्लंघन करने वालों पर प्रत्येक घटना के लिए 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बावजूद सरकारी महकमों के आयोजनों में प्लास्टिक का ही उपयोग होता है। सरकारी कार्यालयों में भी नियम का पालन नहीं हुआ तो प्रदेश में प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण पाना मुश्किल होगा। सरकारी अधिकारियों को सबसे पहले खुद नियम का पालन करना होगा ताकि हिमाचल प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य सफल हो सके।