उन्होंने बताया कि 2022 में सरकार और भारतीय बैंक संघ ने यूनाइटेड फोरम के साथ चर्चा करके इस विषय पर सहमति जताई थी। 2023 में विचार-विमर्श के बाद यह तय हुआ कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन कार्य समय में 40 मिनट की वृद्धि की जाएगी और शेष सभी शनिवार अवकाश घोषित किए जाएंगे। यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन पिछले दो वर्षों से सरकार की स्वीकृति लंबित है। सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर यूनाइटेड फोरम ने 24 और 25 मार्च 2025 को दो दिन की हड़ताल का आह्वान किया था। उस समय सरकार ने कहा था कि यह विषय सक्रिय विचाराधीन है, इसलिए हड़ताल स्थगित कर दी गई थी। नरेंद्र शर्मा ने कहा कि इस आश्वासन के बावजूद अब तक स्वीकृति नहीं दी गई, इसलिए विभिन्न विरोध कार्यक्रमों के बाद आज हड़ताल का निर्णय लिया गया।
नरेंद्र शर्मा ने बताया कि वित्तीय क्षेत्र में रिजर्व बैंक, जीवन बीमा निगम और जनरल इंश्योरेंस कंपनी में यह व्यवस्था पहले से लागू है और केंद्र व राज्य सरकारों के अधिकांश कार्यालय भी सोमवार से शुक्रवार तक कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों में पहले से ही दूसरे और चौथे शनिवार अवकाश है, इसलिए सोमवार से शुक्रवार तक कार्य समय बढ़ाकर शेष शनिवार अवकाश घोषित करने से ग्राहकों को कोई असुविधा नहीं होगी। हड़ताल के दौरान यूनाइटेड फोरम के संयोजक नरेंद्र शर्मा, एआईबीओसी के राज्य सचिव खेम राज वर्मा, अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, भूतपूर्व अध्यक्ष इश्वर सिंह नेगी, एसबीआईओए के अध्यक्ष दीपक कुमार, यूसीओ बैंक अधिकारी संघ के जनरल सेक्रेटरी पियूष राठौर, पीएनबीओए के सचिव सिद्धार्थ जरेट, एसबीआई कर्मचारी संघ के सचिव अंकुश मेहता, एबीआईईए के मोहन लाल, यूसीओ बैंक कर्मचारी संघ के नेता अंकुर रोहाल, बीईएफआई के सचिव राजिंदर कुमार, बैंक ऑफ बड़ौदा अधिकारी संघ के नेता जुनैद खान, केनरा बैंक अधिकारी संघ के नेता मनीष मचान, एआईबीईए के अमर चंद, यूनियन बैंक अधिकारी संघ के संजय नेगी सहित अन्य नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। यूनाइटेड फोरम ने बैंकिंग जनता से भी अपील की है कि हड़ताल के दौरान किसी भी असुविधा के लिए उनका सहयोग करें।