प्रदेश सरकार ने सूबे के पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में नए भवनों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया है। बरसात में भूस्खलन और हादसों की आशंका को देखते नई व्यवस्था के आदेश जारी किए गए हैं।
बीते वर्ष मानसून सीजन में मूसलाधार बारिश से हुए हादसों से सबक लेते हुए प्रदेश में दो महीने तक भवन निर्माण पर रोक लगाई गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान अगर कोई भवन मालिक निर्माण कराते हैं और भूस्खलन व डंगा गिरता है तो इसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे।
सरकार इसके लिए किसी तरह का मुआवजा नहीं देगी। टाउन प्लानरों को भी दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं। बीते वर्ष बरसात के सीजन में हिमाचल में भारी नुकसान हुआ था। 20 से अधिक भवन गिर गए थे। सरकार को मुआवजे के रूप में इससे 841 करोड़ की चपत लगी। लोक निर्माण विभाग को सबसे ज्यादा 606.41 करोड़ का नुकसान हुआ था।
मूसलाधार बारिश के चलते जिन लोगों के भवन और डंगे गिरे उन्हें राहत के तौर पर सरकार ने 500 से अधिक तिरपाल बांटे। इस बार सरकार ने लोगों को हिदायत दी है कि बारिश के दौरान जमीन की कटिंग न करें।
टाउन प्लानर राजेंद्र चौहान ने कहा कि पहाड़ों पर बरसात के दौरान कटिंग करना खतरनाक है। लोगों को दिक्कत न हो इसलिए यह व्यवस्था की गई है। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि बरसात खत्म होते ही लोग फिर से भवन निर्माण कर सकेंगे।
400 भवनों के नक्शे हुए है पास
हिमाचल में इस साल टीसीपी क्षेत्र में ही 400 से अधिक लोगों के भवन निर्माण संबंधी नक्शे पास हुए हैं। सूबे में औसतन हर साल 100 से अधिक भवनों का निर्माण होता है।