शहरी क्षेत्र में न्यूनतम आय सीमा बढ़ाने को लेकर नगर निगम ने शहरी विकास विभाग को भेजा है प्रस्ताव
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जवाब न आने पर अब भेजा रिमाइंडर
शहर में 35 हजार रखी है वार्षिक आय सीमा
ग्रामीण क्षेत्र में सरकार ने 50 कर दी आय सीमा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड अभी नहीं बनेंगे। इसके अलावा पुराने बीपीएल कार्ड भी रिन्यू नहीं हो पाएंगे। बीपीएल कार्ड बनाने के लिए न्यूनतम आय सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने से नगर निगम ने इस कार्य पर रोक लगा दी है।
नगर निगम ने इस पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए शहरी विकास विभाग को रिमाइंडर भेज दिया है। नगर निगम ने कुछ महीने पहले भी विभाग को इस बारे में प्रस्ताव भेजा था। इसमें कहा गया है कि शहर में न्यूनतम आय सीमा को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं। हालांकि विभाग की ओर से अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं आया है। ऐसे में नगर निगम ने दोबारा विभाग को रिमाइंडर भेजा है। शिमला शहर में अभी भी बीपीएल कार्ड बनाने के लिए पुराने नियम लागू हैं। इसके अनुसार सिर्फ उन्हीं गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाए जा सकते हैं जिनकी वार्षिक आय सीमा 35 हजार रुपये से कम है। वहीं ग्रामीण इलाकों में सरकार ने इस आय सीमा को 35 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये वार्षिक कर दिया है। पंचायतों में अब नई आय सीमा के आधार पर गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाए जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र को लेकर अभी निर्देश जारी नहीं हुए हैं। शहर के लोग भी इस आय सीमा को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसलिए इसका प्रस्ताव विभाग को भेजा है।
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शहर में बनने हैं 3200 परिवारों के कार्ड
नगर निगम के अनुसार शिमला शहर में 3200 से ज्यादा गरीब परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाए जा सकते हैं। अभी करीब 2500 लोगों के कार्ड बने हैं लेकिन यह अब रिन्यू नहीं हो रहे हैं। लोग इन्हें रिन्यू करवाने के लिए नगर निगम दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। कई गरीब परिवार इस सूची में शामिल होने के लिए आवेदन भी कर रहे हैं लेकिन इन्हें अब नए निर्देशों के आनेका इंतजार करना होगा। बीपीएल कार्ड से गरीब परिवार सस्ते राशन से लेकर स्कूलों में दाखिले, छात्रवृत्रि, नौकरी में कोटा जैसे लाभ ले सकते हैं।
विभाग को भेजा रिमांइडर : भुवन
बीपीएल के लिए न्यूनतम आय सीमा को लेकर शहरी विकास विभाग को प्रस्ताव भेजा है। इसका जवाब नहीं आया है। अब रिमाइंडर भेजा जा रहा है ताकि शहर में नए कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
-डॉ. भुवन शर्मा, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम