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अंगोरा पालन से प्रतिबंध हटा, 25 हजार परिवारों को मिलेगा रोजगार

Sun, 07 Oct 2018 10:37 AM IST
सतीश ठाकुर, अमर उजाला, गोहर (मंडी)
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हिमाचल में अंगोरा पालन पर केंद्र सरकार की ओर से चार साल पहले लगाया प्रतिबंध हट गया है। इससे जुड़े सूबे के करीब 25 हजार परिवारों को अब रोजगार मिलने की उम्मीद जग गई है। अंगोरा ऊन से शॉल, टोपी, मफलर समेत कई अन्य कीमती वस्त्र बनाए जाते रहे हैं।

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अंगोरा ऊन से धागा भी तैयार किया जाता है। इनकी देश-विदेश में खूब डिमांड रहती है। केंद्र सरकार की भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने हिमाचल, राजस्थान और तमिलनाडु में लगा प्रतिबंध हटा दिया है।

आईसीएआर ने अब दोबारा अपने सरकारी व निजी फार्मों में अंगोरा पालन की अधिसूचना जारी की है। सूबे में एकमात्र सरकारी केंद्र कुल्लू के गड़सा में है। प्रदेश में मंडी, कुल्लू, सोलन, पालमपुर, शिमला में अंगोरा पालन से हजारों किसान जुड़े हैं। 
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पर्यावरण मित्र व्यवसाय अंगोरा पालन से प्रतिबंध हटने से हजारों खरगोश पालकों ने फिर अंगोरा पालन शुरू करने की तैयारी कर दी है। मंडी जिले की कमरू घाटी के किसानों ने आईसीएआर के उत्तरी शीतोष्ण क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र गड़सा, कुल्लू में अंगोरा खरगोश पालने को आवेदन करना शुरू कर दिया है।

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एक साल तक फीड, पिंजरा, खरगोश मुफ्त 

एनटीआरएस के प्राचार्य वैज्ञानिक डॉ. एसआर शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार से इस संबंध में सर्कुलर मिला है। अंगोरा पालन के लिए खरगोश पालक उनके संस्थान में आवेदन कर सकते हैं। एक साल के लिए अंगोरा खरगोश, फीड और पिंजरा मुफ्त में दिया जाएगा।

खरगोश पालकों ने जताई खुशी 
मंडी जिला अंगोरा ऊन उत्पादक संघ के अध्यक्ष ओपी नेगी ने आईसीएआर का आभार जताया है। खरगोश पालकों बीके ठाकुर, लीला प्रकाश, हेम सिंह, चंद्रमणि, महेंद्र कुमार, धर्मेंद्र कुमार, बीआर मस्ताना, शेर सिंह, दीवान चंद, दीनानाथ और अन्य ने बताया कि वे फिर अंगोरा पालन का व्यवसाय शुरू करेंगे। 
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