कोरोना वायरस के चलते हिमाचल में लॉकडाउन और कर्फ्यू के चलते इस बार बैसाखी पर्व पर सोशल मीडिया में ही बधाई देने तक सीमित रहा। इस बार सूबे के एक दर्जन से अधिक बड़े पवित्र तीर्थ स्थलों में न तो मेले हुए और न ही लोग जुटे।
कोरोना के चलते सभी धार्मिक समारोह रद्द हैं और मंदिरों के कपाट बंद हैं। यहां तक कि लोग नदियों के संगम स्थलों में जुटते थे, इस बार सन्नाटा ही छाया रहा। शक्तिपीठों में भी बंद कपाट के भीतर पूजा-अर्चना हुई। हालांकि, लोग फोन कर बधाइयां देते रहे।
दौलतपुर चौक क्षेत्र में हर वर्ष लोग बैसाखी मेले का बेसब्री से इंतजार करते हैं। मेले में जमकर खरीदारी के अलावा गर्मागर्म जलेबी, पकौड़े और लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं। इस दौरान घड़ों, बर्तनों, कृषि के औजारों की भी खूब बिक्री होती थी, लेकिन इस बार कोरोना ने बैसाखी पर्व पर पानी फेर दिया।
लोग संक्रांति एवं बैसाखी पर्व पर मिट्टी के घड़े के प्याऊ भी लगाते थे। मिट्टी के घड़े दान भी किए जाते थे। इस बार कोरोना के चलते लोगों ने घरों में रहकर ही बैसाखी पर्व पर पूजा-अर्चना की।
प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सहजल बई में न तो लोग पवित्र स्नान करने के लिए आए, न मेला लगा और न ही दुकानें सजीं। मंदिरों में घंटियां नहीं बजीं, लोग भगवान के दर शीश झुकाने भी नहीं पहुंचे और न ही पूजा-अर्चना की गई। बीते रविवार को स्थानीय चौकी प्रभारी तरसेम सिंह ने भी लोगों से अनुरोध किया था कि बैसाखी पर्व घर पर रहकर ही मनाएं।
भीड़भाड़ कहीं न लगाएं। उधर, नपं सचिव सतीश ठाकुर, डीडीएम संस्था के चेयरमैन नरेंद्र शर्मा, रायपुर के उपप्रधान तरसेम सिम्मी, जोह के उपप्रधान साधु सिंह, डंगोह खास के उपप्रधान सुभाष कंवर, पार्षद केवल, राणा, पार्षद धर्मजीत सिंह, पार्षद पंकज, पार्षद रजनीश, पूर्व पार्षद अशोक पठानिया ने बैसाखी पर्व घर पर रहकर मनाने के लिए लोगों की प्रशंसा की है।