फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: चिट्टे तस्करी के 35 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज

विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत का बड़ा फैसला
विज्ञापन

चिट्टा तस्करी गिरोह शाही महात्मा से जुड़े हैं आरोपी
हाईकोर्ट के आदेश पर मामले में दोबारा की गई सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कोटखाई पुलिस थाना में दर्ज बहुचर्चित चिट्टा तस्करी गिरोह के मामले में विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।

अदालत ने मामले से जुड़े 35 आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत निर्धारित दो अनिवार्य शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं। इससे पहले विशेष अदालत ने जनवरी और मार्च 2025 में इन आरोपियों को इस आधार पर जमानत दे दी थी कि उनके कब्जे से सीधे कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ था और उन्हें मुख्य रूप से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) तथा बैंक लेन-देन के आधार पर नामजद किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने पुराने आदेशों को निरस्त करते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए विशेष अदालत को भेज दिया था। साथ ही एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के प्रावधानों के तहत नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार 18 सितंबर 2024 को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर शिमला जिले में टैक्सी में सवार मुदस्सर अहमद मोची के कब्जे से 468.380 ग्राम चिट्टा बरामद किया था। पूछताछ के दौरान अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ जिसमें शाही महात्मा, प्रदीप रांटा और हरिंदर मांटा के नाम सामने आए। अभियोजन का आरोप है कि जमानत मांगने वाले सभी 35 आरोपी छोटे स्तर के पैडलर के रूप में मुख्य आरोपियों के सीधे संपर्क में थे। इनके बीच वित्तीय लेन-देन के भी साक्ष्य मिले हैं।

बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि आरोपियों से कोई सीधी बरामदगी नहीं हुई है, इसलिए धारा 37 की सख्त शर्तें उन पर लागू नहीं होनी चाहिए। अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बरामद चिट्टे की मात्रा व्यावसायिक श्रेणी की है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत जमानत देने से पहले अदालत को संतुष्ट होना आवश्यक है कि आरोपी प्रथमदृष्टया निर्दोष हैं और जमानत पर रिहा होने के बाद वह दोबारा अपराध नहीं करेगा। रिकॉर्ड का हवाला देते हुए अदालत ने पाया कि 35 में से 15 आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें