कोर्ट में आरोपी ने उम्र और बीमारी का दिया था हवाला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। विशेष न्यायालय (एनडीपीएस व सीबीआई कोर्ट) शिमला के विशेष न्यायाधीश डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने अफीम तस्करी के 71 वर्षीय आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद होने और अपराध की गंभीरता को देखते हुए महज ढलती उम्र या सामान्य बीमारियों के आधार पर आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला 10 जुलाई 2026 का है जब विशेष सेल शिमला की पुलिस टीम गश्त पर थी। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि चौड़ा मैदान स्थित दुकान नंबर 3 के नीचे नए मकान में रहने वाला आरोपी सुरिंदर सिंह काफी समय से अफीम बेचने के अवैध धंधे में शामिल है और युवाओं को नशा सप्लाई करता है। सूचना के आधार पर पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों को साथ लेकर शाम करीब 5:20 बजे आरोपी के कमरे पर छापेमारी की। लकड़ी की अलमारी की तलाशी लेने पर पुलिस को 991.440 ग्राम अफीम, दो इलेक्ट्रॉनिक तराजू और 2,12,000 रुपये की नकदी बरामद हुई। इसके बाद पुलिस थाना बालूगंज (वेस्ट शिमला) में एनडीपीएस एक्ट की धारा 18 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर कैथू जेल भेज दिया था। अदालत में दायर जमानत याचिका में आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि सुरिंदर सिंह 71 वर्ष के बुजुर्ग हैं और उनकी एक किडनी काम नहीं कर रही है। वह कई उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं और जेल में उनकी तबीयत बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि बरामद अफीम कमर्शियल मात्रा से कम है, इसलिए जमानत दी जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि आरोपी अपराध के समय भी 71 वर्ष का ही था। अफीम के साथ तराजू और नकदी की बरामदगी आरोपी की संलिप्तता को प्राथमिक रूप से साबित करती है। मामले में जांच अभी शुरुआती चरण में है, ऐसे में आरोपी को जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने और न्याय प्रक्रिया में बाधा पहुंचने की आशंका है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।